पटना, बिहार के राजनीतिक गलियारों में सत्ता परिवर्तन की खबरें अब हकीकत के करीब दिख रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली कूच की तारीखें नजदीक हैं, जिससे राज्य में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राज्यसभा के लिए हाल ही में निर्वाचित नीतीश कुमार 10 अप्रैल 2026 को सदस्यता की शपथ ले सकते हैं। इस संवैधानिक प्रक्रिया के बाद बिहार में मुख्यमंत्री पद खाली हो जाएगा और नए नेतृत्व का रास्ता साफ हो जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 14 अप्रैल 2026 तक बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।
10 अप्रैल को शपथ ग्रहण संभव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ले सकते हैं। इसके लिए सभी प्रशासनिक और वैधानिक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करना नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका की दिशा में एक औपचारिक कदम माना जा रहा है। इससे बिहार की राजनीति में एक युग का समापन होने की संभावना है।
दिल्ली में मुलाकातों का दौर
शपथ ग्रहण के अगले दिन यानी 11 और 12 अप्रैल, नीतीश कुमार दिल्ली में रह सकते हैं। इस दौरान वे केंद्र सरकार के मंत्रियों, अन्य राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं और सहयोगी नेताओं से शिष्टाचार मुलाकात करेंगे। इन मुलाकातों को उनकी विदाई और नई भूमिका की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके बाद वे पटना लौटेंगे और मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र सौंप सकते हैं।
14 अप्रैल को नया नेतृत्व संभव
कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 अप्रैल को बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। यह तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती है और इसी दिन खरमास समाप्त हो रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, खरमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते। ऐसे में यह तारीख बीजेपी और गठबंधन दोनों के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। पार्टी और गठबंधन के भीतर नए नाम पर आम सहमति लगभग बन चुकी है। नए मुख्यमंत्री की घोषणा के साथ ही बिहार में प्रशासनिक फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है।
नीतीश कुमार की नई भूमिका
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद बिहार में गठबंधन की स्थिरता और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए नए नेतृत्व का चयन किया जाएगा। राज्यसभा में नीतीश कुमार की उपस्थिति उनके राष्ट्रीय राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत करेगी। बिहार की जनता और राजनीतिक विश्लेषक अब इस तारीख का इंतजार कर रहे हैं, ताकि राज्य की राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट हो सके और भविष्य की दिशा तय हो।



