सोने के बाद अब चांदी की बारी: सरकार ने अचानक लिया ऐसा फैसला कि बाजार में मच गया हड़कंप

नई दिल्ली, सोने के बाद अब चांदी के खरीदारों और व्यापारियों के लिए एक बहुत बड़ी और हैरान करने वाली खबर आई है। केंद्र सरकार ने देश में चांदी के आयात (इंपोर्ट) को लेकर नए और बेहद कड़े नियम लागू कर दिए हैं।

सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चांदी की कई अहम कैटेगरीज को ‘फ्री लिस्ट’ से सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया है और उन्हें ‘रिस्ट्रिक्टेड’ यानी प्रतिबंधित कैटेगरी में डाल दिया है। इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि अब विदेशों से चांदी मंगाना पहले जितना आसान नहीं रह जाएगा और इसके लिए सरकार से अतिरिक्त मंजूरी और कड़े लाइसेंस की जरूरत पड़ने वाली है।

आखिर सरकार ने क्यों लिया यह अचानक फैसला?

मोदी सरकार के इस अचानक उठाए गए कदम के पीछे एक बहुत बड़ी आर्थिक रणनीति छिपी है। सरकार का मुख्य मकसद देश में लगातार बढ़ रहे कीमती धातुओं के आयात पर लगाम लगाना और ‘ट्रेड डेफिसिट’ यानी व्यापार घाटे को तेजी से कम करना है। पिछले काफी समय से देश में सोना और चांदी दोनों के आयात पर भारी दबाव देखा जा रहा था। इसकी वजह से भारत के कीमती विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) पर भी बुरा असर पड़ने की चिंता लगातार सता रही थी, जिसे संभालने के लिए यह बड़ा फैसला लिया गया है।

सोने की जगह चांदी की तरफ भाग रहे थे लोग, सरकार ने भांप ली चाल

इस पाबंदी के पीछे सरकार की एक और बड़ी चिंता भी सामने आई है। दरअसल, सरकार को इस बात का पूरा अंदेशा है कि सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) बढ़ाए जाने के बाद लोग अब निवेश (Investment) और ज्वेलरी के लिए तेजी से चांदी की तरफ रुख कर रहे हैं। सोने के मुकाबले चांदी काफी सस्ती होने के कारण लोग इसे एक सुरक्षित विकल्प मानकर भारी मात्रा में खरीद रहे थे। इसी संभावना और ट्रेंड को समय रहते भांपते हुए सरकार ने चांदी के बेलगाम आयात पर समय से पहले ही सख्ती शुरू कर दी है।

आपको याद दिला दें कि हाल ही में सरकार ने एक और बड़ा झटका देते हुए सोना और चांदी दोनों पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को सीधे 6 फीसदी से बढ़ाकर भारी-भरकम 15 फीसदी कर दिया था। इसके बावजूद बाजार में यह आशंका बनी हुई थी कि निवेशक सोने की भारी कीमतों से बचकर चांदी की ताबड़तोड़ खरीदारी बढ़ा सकते हैं।

विदेशी मुद्रा बचाने और रुपये को मजबूती देने पर पूरा जोर

मौजूदा समय में सरकार का पूरा फोकस अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपये पर बढ़ रहे दबाव को कम करने पर टिका हुआ है। वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल, युद्ध के हालातों और लगातार बढ़ते इंपोर्ट बिल को देखते हुए सरकार अब किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है और पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है।

बाजार के बड़े आर्थिक विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि अगर देश में सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं का आयात इसी रफ्तार से लगातार बढ़ता रहा, तो इससे भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) और व्यापार घाटा दोनों ही खतरनाक स्तर पर पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि सरकार अब आयात पर सीधा नियंत्रण रखकर स्थिति को अपने काबू में रखने की हरसंभव कोशिश कर रही है।

30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा आयात, आगे और मंदी के आसार

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो एक और चौंकाने वाली बात सामने आती है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के महीने में ही देश के भीतर सोने और चांदी का आयात गिरकर पिछले करीब 30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। इंपोर्ट में आई इस भारी गिरावट के पीछे सरकार द्वारा बढ़ाई गई ऊंची इम्पोर्ट ड्यूटी और इंटरनेशनल मार्केट में सोना-चांदी की आसमान छूती कीमतों को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। अब सरकार द्वारा लगाई गई इन नई पाबंदियों के बाद यह साफ माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में चांदी के आयात में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

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