नई दिल्ली, सीबीएसई बोर्ड ने इस बार क्लास 10 के बोर्ड एग्जाम को लेकर बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने 10वीं के बोर्ड एग्जाम साल में दो बार कराने का फैसला लिया है. लेकिन, यह भी साफ किया है कि दूसरा अटेंप्ट सिर्फ ऑप्शनल है.
यानी जो बच्चे अपने मार्क्स से खुश नहीं हैं, वे दूसरी बार एग्जाम दे सकते हैं. सबसे जरूरी बात ये है कि पहले अटेम्प्ट को ही मेन एग्जाम माना जाएगा. दूसरी बार एग्जाम देने का मौका सिर्फ स्कोर सुधारने के लिए होगा, कोई कंपल्शन नहीं. इस नई व्यवस्था का मकसद स्टूडेंट्स पर से बोझ कम करना और उन्हें दोबारा मौका देना है, जिससे कम मार्क्स की वजह से कोई बच्चा निराश न हो.
दूसरी बार एग्जाम है ऑप्शनल
बोर्ड ने साफ कहा है कि दूसरी परीक्षा सिर्फ उन स्टूडेंट्स के लिए है जो अपने मार्क्स सुधारना चाहते हैं. अगर आप पहली परीक्षा में ही अच्छे अंक ले आते हैं तो दूसरी बार एग्जाम देने की कोई जरूरत नहीं. यह एग्जाम उन बच्चों के लिए एक सेकेंड चांस की तरह है, जो अपनी परफॉर्मेंस से खुश नहीं होते. साथ ही सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्टूडेंट यह नहीं चुन सकते कि उन्हें पहली या दूसरी परीक्षा में मिले हुए मार्क्स में से कौन सा रिजल्ट चाहिए. सिर्फ वही एग्जाम का रिजल्ट माना जाएगा जिसमें स्टूडेंट ने बेहतर प्रदर्शन किया है.
क्यों किया गया यह बदलाव
कई बच्चे पहली बार बोर्ड में घबरा जाते हैं. इस वजह से उनकी परफॉर्मेंस सही नहीं आ पाती. पहले, इम्प्रूवमेंट एग्जाम में सिर्फ दो सब्जेक्ट में ही सुधार कराया जा सकता था. अब सिस्टम ज्यादा आसान और फायदेमंद है, बच्चे अपनी जरूरत के हिसाब से पूरे विषय का एग्जाम फिर से दे सकते हैं, वो भी बस कुछ महीनों के अंदर. पहले सिर्फ दो सब्जेक्ट्स में सुधार का मौका मिलता था. अगर री-एग्जाम में मार्क्स कम भी आ जाएं, तब भी वही मार्क्स फाइनल हो जाते थे. इसी डर से बच्चे इम्प्रूवमेंट एग्जाम देने से बचते थे. अब नई व्यवस्था में ऐसा नहीं होगा. दूसरा मौका सिर्फ स्कोर बेहतर करने के लिए है, न कि स्टूडेंट पर और तनाव डालने के लिए.
प्रिंसिपल्स का क्या कहना है
कई सीबीएसई स्कूलों के प्रिंसिपल मानते हैं कि बोर्ड की यह नई व्यवस्था एनईपी के मुताबिक है और इससे बच्चों को बड़ा फायदा मिलेगा. उनके अनुसार, दो बार एग्जाम का ऑप्शन मिलने से सिस्टम में लचीलापन बढ़ेगा, बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम होगा और एग्जाम फोबिया भी काफी हद तक घटेगा. साथ ही, जिन स्टूडेंट्स को अपने मार्क्स सुधारने का मौका मिलेगा, उनका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा. पहली परीक्षा का रिजल्ट अप्रैल में आएगा, जबकि दूसरी परीक्षा का रिजल्ट जून के आखिर तक जारी किया जाएगा.
बोर्ड का नया आदेश
-जून में सीबीएसई ने आदेश जारी किया था कि 10वीं की बोर्ड परीक्षा अब साल में दो बार होगी
-पहला एग्जाम फरवरी में होगा जिसे देना अनिवार्य होगा और दूसरा मई में जो ऑप्शनल रहेगा
-जिन जगहों पर ठंड के कारण फरवरी में स्कूल बंद रहते हैं, वहां के बच्चों को दूसरा मौका भी मिलेगा.
-यानी इस बदलाव से किसी बच्चे की पढ़ाई या एग्जाम मिस नहीं होगी.
किन बच्चों को होगा फायदा
-जो पहली बार में अपना बेस्ट नहीं दे पाते
-जिन्हें किसी खास सब्जेक्ट में कम मार्क्स आते हैं
-जो रिजल्ट आने के बाद अपने नंबर सुधारने का प्लान बनाते हैं
ये होंगे नियम
-पहली परीक्षा ही असली बोर्ड परीक्षा है, इसमें बैठना सबके लिए जरूरी है
-दूसरी एग्जाम ऑप्शनल होगा, इसे सिर्फ वही स्टूडेंट्स दे सकते हैं जो अपने मार्क्स बढ़ाना चाहते हैं
-पहले एग्जाम में एब्सेंट स्टूडेंट्स सेकेण्ड अटेम्प्ट नहीं दे पाएंगे
-अगर फर्स्ट अटेम्प्ट में तीन से ज्यादा सब्जेक्ट्स में एब्सेंट रहे ऐसे में दूसरा मौका नहीं मिलेगा
-दूसरी परीक्षा सिर्फ उन्हीं सब्जेक्ट्स में होगी जिनका एक्सटर्नल असेसमेंट 50 से ज्यादा है
-प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट दोबारा नहीं होंगे, दूसरी परीक्षा केवल थ्योरी के लिए है




