लखनऊ, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी के विकासनगर में 250 से अधिक झोपड़ियों में लगी भीषण आग के मामले में गंभीर रुख अपनाया है। शुक्रवार को इस मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जिलाधिकारी और नगर निगम को 30 मई तक विस्तृत जवाबी शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और मुख्य अग्निशमन अधिकारी से भी जवाब मांगा गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता से कड़े सवाल किए। न्यायालय ने पूछा कि आखिर कैसे पिछले 20 वर्षों से पीडब्ल्यूडी की करीब चार बीघा जमीन पर 1455 लोग अतिक्रमण कर बस गए और प्रशासन इस पर चुप क्यों रहा। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि इन लोगों को बिजली और कुकिंग गैस कनेक्शन किन कंपनियों के जरिए दिए गए और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई।
अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि 15 अप्रैल को हुए अग्निकांड के पीड़ितों के लिए तुरंत राहत कार्य सुनिश्चित किए जाएं। पीड़ितों को भोजन, रहने की व्यवस्था और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। साथ ही पीडब्ल्यूडी और प्रदेश के राहत आयुक्त को भी इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने संकेत दिया कि पूरे प्रकरण की गहन जांच भी कराई जा सकती है और भविष्य में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अनुराग त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
गौरतलब है कि 15 अप्रैल को लखनऊ के विकासनगर इलाके में शाम करीब 5:30 बजे भीषण आग लग गई थी। आग इतनी भयंकर थी कि 30 से अधिक गैस सिलेंडर फट गए और 250 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। आग से उठता धुआं करीब 10 किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया। एहतियात के तौर पर आसपास के 20 मकानों को खाली कराया गया था। फायर ब्रिगेड की लगभग 20 गाड़ियों ने करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान पूरे इलाके की बिजली काट दी गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए राजनाथ सिंह ने जिलाधिकारी से फोन पर जानकारी ली, जबकि ब्रजेश पाठक ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
हादसे के दूसरे दिन पुलिस को दो मासूम बच्चियों के शव मिले, जिनकी पहचान बाराबंकी निवासी सतीश की बेटियों के रूप में हुई। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। प्रभावित परिवारों को फिलहाल कम्युनिटी सेंटर और रैन बसेरों में शिफ्ट किया गया है, जहां भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।




