बालेन शाह बोले सिर्फ फोटो खिंचवाने नहीं आऊंगा भारत दौरे से पहले नेपाली प्रधानमंत्री ने रखी कई शर्तें

नई दिल्ली, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी पहली भारत यात्रा को लेकर एक बेहद स्पष्ट और रणनीतिक रुख अपना रहे हैं। पारंपरिक तौर पर नेपाल के नए प्रधानमंत्री शपथ लेने के बाद सबसे पहले भारत का दौरा करते हैं, लेकिन बालेन इस रस्म को महज एक औपचारिकता (Symbolism) तक सीमित नहीं रखना चाहते।

उन्होंने नई दिल्ली के सामने साफ कर दिया है कि वे केवल ‘फोटो खिंचवाने’ नहीं, बल्कि ठोस नतीजे हासिल करने के लिए आएंगे।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्योता मिल चुका है और बालेन शाह ने इसे स्वीकार भी कर लिया है। हालांकि, दौरे की तारीखें उन शर्तों और एजेंडे पर टिकी हैं जिन पर दोनों देशों के अधिकारी फिलहाल काम कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि, बालेन शाह द्वारा पीएम मोदी के सामने रखी जाने वाली संभावित शर्तें और मुद्दे निम्नलिखित हो सकते हैं।

PM Modi Balen Shah Meeting: हवाई मार्ग (Air Route) की मांग

नेपाल लंबे समय से भारत से अतिरिक्त ‘वेस्टर्न एयर एंट्री पॉइंट’ (Western Air Entry Point) की मांग कर रहा है। भैरहवा और पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के सफल संचालन के लिए यह मार्ग बेहद जरूरी है। बालेन शाह इस पर लिखित आश्वासन या ठोस प्रगति चाहते हैं ताकि नेपाल का वैश्विक हवाई संपर्क बेहतर हो सके।

Lipulekh Border Issue: लिपुलेख और सीमा व्यापार पर स्पष्टता

बालेन शाह चाहते हैं कि लिपुलेख के जरिए होने वाले भविष्य के भारत-चीन व्यापार समझौते में नेपाल को भी एक पक्ष के रूप में शामिल किया जाए। वे इस मुद्दे पर ‘ट्रायलेटरल’ (त्रिपक्षीय) या कम से कम नेपाल के हितों को सुरक्षित करने वाली बातचीत को प्राथमिकता दे रहे हैं।

‘ग्रेटर नेपाल’ और सांस्कृतिक मानचित्र विवाद

काठमांडू के मेयर रहते हुए बालेन शाह ने अपने कार्यालय में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगाया था, जो भारत के ‘अखंड भारत’ भित्ति चित्र (Mural) के जवाब में था। वे चाहते हैं कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सीमाओं से जुड़े इन संवेदनशील मुद्दों पर दोनों देश खुले दिमाग से बात करें ताकि भविष्य में कूटनीतिक कड़वाहट न आए।

चीन और भारत के बीच संतुलन (Red Line)

भारत के लिए नेपाल का चीन के प्रति झुकाव हमेशा एक ‘रेड लाइन’ रहा है। बालेन शाह को दिल्ली को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनकी सरकार ‘नेपाल फर्स्ट’ की नीति पर चलेगी और नेपाली जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने देगी। बदले में, वे भारत से नेपाल के आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप और आर्थिक सहयोग का मजबूत वादा चाहते हैं।

ऊर्जा और व्यापार घाटा

नेपाल से भारत को बिजली निर्यात करने की प्रक्रिया को और सरल बनाना और व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारतीय बाजार में नेपाली उत्पादों को आसान पहुंच

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