नई दिल्ली, विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 पर इस समय देशभर में राजनीति हो रही है. बुधवार को इसपर संसद में हंगामा भी देखने को मिला. सरकार का आरोप है कि विपक्षी सांसद संशोधन बिल पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं.
केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि FCRA संशोधन बिल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है. उन्होंने साफ कहा कि यह बिल किसी धर्म या संगठन के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मकसद देश के हित में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करना है. उन्होंने कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों पर आरोप लगाया कि वे आने वाले विधानसभा चुनाव की वजह से केरल में लोगों को गुमराह कर रहे हैं.
लोकसभा में बोलते हुए रिजिजू ने कहा, “केरल के सांसद एक बड़ी गलतफहमी में हैं. FCRA संशोधन बिल पहले ही पेश किया गया था, इसलिए अब इस पर चर्चा हो रही है. मैंने कल और आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को बता दिया था कि आज इस बिल पर विचार नहीं होगा, लेकिन फिर भी FCRA को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है.
चलिए जानते हैं कि आखिर यह बिल क्या है और क्यों विवाद गहरा रहा है. दरअसल FCRA बिल 2026, 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था. इसका मकसद विदेशी योगदान (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 में बदलाव करना और भारत में विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बिल का मकसद पारदर्शिता लाना है तो विवाद क्यों है तो, इसके लिए पहले बिल में किए जाने वाले बदलावों के बारे में जानते हैं.
FCRA संशोधन बिल में क्या है?
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लोक सेवकों (Public Servants) को विदेशी फंड लेने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया, जिससे दायरा बहुत व्यापक हो गया है.
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किसी भी NGO को अब अपना विदेशी फंड दूसरे NGO या संस्था को ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं है, चाहे दूसरी संस्था के पास FCRA रजिस्ट्रेशन ही क्यों न हो.
3
NGO का लाइसेंस खत्म होते ही उसके फंड और एसेट सरकार की नियुक्त अथॉरिटी के कंट्रोल में जा सकते हैं.
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विदेशी फंड को तय समय के भीतर खर्च करना अनिवार्य किया जाएगा.
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FCRA रजिस्ट्रेशन या नवीनीकरण के लिए सभी पदाधिकारियों, निदेशकों और प्रमुख व्यक्तियों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है, जबकि विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट जरूरी है.
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सभी NGO को विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI), नई दिल्ली की मुख्य शाखा में FCRA अकाउंट खोलना होगा.
7
सरकार अब किसी भी संस्था का FCRA सर्टिफिकेट 360 दिनों तक निलंबित कर सकती है, जबकि पहले यह अवधि 180 दिन थी.
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
जबकि विपक्ष और बड़ी तादाद NGOs सरकार के इस बिल का विरोध कर रही हैं. उनका आरोप है कि सरकार इस बिल की मदद से अपना कंट्रोल मजबूत कर रही है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा,’NGOs की विदेशी फंडिंग को नियमित करने के नाम पर जो Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 की धांधली होने वाली है, उसको लाने से पहले भाजपा बताए कि जो पैसा विदेशों से PM CARE FUND, इलेक्टोरल बॉण्ड के और मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदा का हिसाब कब और कौन देगा. ‘
अखिलेश यादव ने आगे कहा,’भाजपा सरकार खुद तो कुछ करती नहीं है और जो सच्चे स्वतंत्र NGOs अच्छा काम कर रहे हैं उनको भी नहीं करने देना चाहती है क्योंकि कई बार जनता कहती है कि सरकार से ज़्यादा अच्छा काम तो गैर सरकारी संस्थाएं कर दिखाती हैं, इससे कई मोर्चों पर सरकार की बेहद किरकिरी होती है और भाजपाइयों की नाकामी उजागर हो जाती है.’
सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में एकरूपता चाहती है-भाजपा
समाजवादी पार्टी (एसपी) की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि इस विधेयक को पेश करने का मकसद सरकारी और गैर-सरकारी दोनों क्षेत्रों में एकरूपता लागू करना है. उन्होंने आगे कहा,’सरकार चाहती है कि चाहे वह सरकारी संस्था हो या गैर-सरकारी संस्था, सब कुछ उनके मुताबिक चले, इसीलिए यह संशोधन विधेयक लाया जा रहा है.
रामगोपाल यादव ने भी किया हमला
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए दावा किया कि मौजूदा सरकार के बिल जन कल्याण की अपेक्षा कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने कहा,’इस सरकार के जरिए अब तक लाया गया हर बिल देश की जनता के खिलाफ है. अब तक लाया गया हर बिल कुछ पूंजीपतियों के हित में है. एक भी विधेयक जनता के हित में नहीं है.’




