धार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि विवादित ढांचे की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी सरस्वती मंदिर की है. इसके साथ ही जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच ने मुस्लिम पक्ष के कमाल मौला मस्जिद के दावे को खारिज कर दिया है.
वहीं इस फैसले पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का बयान आया है. उन्होंने इस फैसले को बाबरी मस्जिद के फैसले से जोड़कर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है.
ओवैसी ने कोर्ट के फैसले पर क्या कहा?
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट कर लिखा- ‘हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस गलती को सुधारेगा और इस आदेश को रद्द कर देगा. इसके साथ ही उन्होंने इस फैसले को बाबरी मस्जिद से भी जोड़ दिया है. उन्होंने लिखा कि इस फैसले की बाबरी मस्जिद के फैसले के साथ स्पष्ट समानताएं हैं.
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कोर्ट ने क्या कहा?
एमपी हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर कहा कि भोजशाला परिसर-कमाल मौला मस्जिद एक संरक्षित स्मारक हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इस जगह पर हिंदुओं की पूजा-अर्चना सदियों से बिना किसी रुकावट के जारी है. कोर्ट के फैसले के अनुसार, ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस जगह को संस्कृत सीखने के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में बताते हैं जबकि आर्कियोलॉजिकल एविडेंस देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के वजूद की ओर इशारा करते हैं. बेंच ने इस बात पर भी जोर दिया कि देवी की पवित्रता की रक्षा करना और इस जगह पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक संवैधानिक जिम्मेदारी है.
ASI के आदेश को किया रद्द
एक अहम कदम उठाते हुए कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें हिंदुओं के पूजा के अधिकारों को सीमित कर दिया था और मुसलमानों को कुछ खास दिनों पर इस जगह पर नमाज पढ़ने की अनुमति दे दी थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड, आर्कियोलॉजिकल एविडेंस और कानूनी दस्तावेजों के हजारों पन्नों की जांच की. 2,000 से ज्यादा पन्नों की ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट ने संकेत दिया कि मस्जिद से पहले इस जगह पर एक बड़ा स्ट्रक्चर मौजूद था और पुराने मंदिर के स्ट्रक्चर के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल मौजूदा इमारत में भी किया गया था.




