लखनऊ, उत्तर प्रदेश अब देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे नेटवर्क बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश में सड़क ढांचे को इतना मजबूत करने की तैयारी में हैं कि अगले चार वर्षों में प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
यूपी एक्सप्रेसवेज़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) के अनुसार, राज्य में 11 नए एक्सप्रेस-वे तैयार किए जाएंगे, जिनसे न केवल आवागमन सुगम होगा बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
एक्सप्रेस-वे से सड़क क्रांति की नई तस्वीर
वर्तमान में आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और लखनऊ-कानपुर जैसे कई एक्सप्रेस-वे पहले से ही चालू हैं। अब इनसे जुड़ने के लिए 11 नए एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है। इनमें जेवर लिंक, झांसी लिंक, मेरठ-हरिद्वार, नोएडा-जेवर, चित्रकूट-रीवा, विध्य एक्सप्रेस-वे और विध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे प्रमुख हैं। सभी परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 1500 किलोमीटर से अधिक होगी।
प्रोजेक्ट्स की तैयारी और समयसीमा
UPEIDA ने बताया है कि सभी प्रोजेक्ट्स के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट), भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की समयसीमा तय की जा चुकी है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेस-वे अगस्त 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को फर्रुखाबाद के रास्ते एक नए लिंक एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण फरवरी 2026 तक पूरा होगा। लखनऊ की सीमा पर बनने वाला लिंक एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को आपस में जोड़ेगा, जिससे राजधानी का ट्रैफिक और भी संतुलित होगा।
कौन-कौन से जिले होंगे लाभान्वित
इन परियोजनाओं से लखनऊ, आगरा, कानपुर, वाराणसी, झांसी, चित्रकूट, प्रयागराज, मेरठ, नोएडा, और जेवर जैसे प्रमुख शहरों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही टीयर-2 और टीयर-3 शहरों को जोड़ने से छोटे शहरों में भी विकास और निवेश के अवसर खुलेंगे।
औद्योगिक विकास को नई दिशा
सरकार का लक्ष्य सिर्फ तेज सड़कें बनाना नहीं, बल्कि हर एक्सप्रेस-वे के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करना है। इन कॉरिडोर में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स हब, और वेयरहाउसिंग जोन बनाए जाएंगे। इससे प्रदेश में स्थानीय रोजगार, निवेश और उद्योगिक उत्पादन में जबरदस्त वृद्धि होने की संभावना है।




