लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी ‘झालमुड़ी डिप्लोमेसी’ और सादगी से सुर्खियां बटोर रहे भाजपा के बड़े नेताओं के बीच अब एक नया आंतरिक विवाद खड़ा हो गया है।
17 अप्रैल की आधी रात को लखनऊ की सड़कों पर हुआ एक प्रदर्शन अब राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और सदस्य ऋतु शाही के लिए गले की फांस बनता दिख रहा है। सूत्रों की मानें तो महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के बहाने विपक्ष पर हमलावर होने की कोशिश में इन दोनों नेताओं ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे भाजपा आलाकमान को ही शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।
आधी रात का वो ‘झंडा कांड’ और अखिलेश का तंज
पूरा मामला 17 अप्रैल की देर रात का है, जब अपर्णा यादव और ऋतु शाही ने कुछ मुट्ठी भर महिलाओं के साथ विधानसभा के बाहर सपा और कांग्रेस के झंडे जलाए। अपर्णा ने विपक्षी नेताओं की तुलना ‘दुर्योधन और दुशासन’ से करते हुए इसे एक ‘कलंकित रात’ बताया था। लेकिन इस प्रदर्शन की धार तब कुंद हो गई जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस पर तंज कस दिया। अखिलेश ने चुटकी लेते हुए लिखा कि “12 करोड़ महिलाओं वाले यूपी में भाजपा ने सिर्फ 12 महिलाओं को विरोध के लिए भेजा।” इस एक पोस्ट ने भाजपा के उस बड़े नैरेटिव को कमजोर कर दिया, जिसे पार्टी महिला सशक्तिकरण के नाम पर गढ़ना चाहती थी।
भाजपा हाईकमान क्यों है आगबबूला?
सूत्रों के मुताबिक, यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह इस घटना से बेहद नाराज हैं। पार्टी का मानना है कि बिना अनुमति और बिना तैयारी के किए गए इस छोटे से प्रदर्शन ने विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा दे दिया। आलाकमान का सवाल है कि जब पार्टी इसे राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बनाने की योजना बना रही थी, तब इन दो नेताओं ने इतने कम संख्या बल के साथ सड़कों पर उतरकर पार्टी की ‘किरकिरी’ क्यों कराई?
जवाबदेही तय: क्या जाएगा कारण बताओ नोटिस?
खबर है कि पार्टी नेतृत्व अब इस मामले में कड़ी कार्रवाई के मूड में है। अपर्णा यादव और ऋतु शाही से या तो लिखित में स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है या फिर उन्हें मौखिक तौर पर तलब किया जा सकता है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी चर्चा है कि ऋतु शाही की महिला आयोग में नियुक्ति से पहले ही एक धड़ा नाराज था, और अब इस ‘झंडा कांड’ ने आग में घी डालने का काम किया है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी की रणनीति इस बिल पर विपक्ष को घेरने की थी, लेकिन इस बचकानी हरकत ने पूरी योजना को ‘बैकफायर’ कर दिया है।
क्या अपर्णा की सादगी पर पड़ेगा असर?
पिछले कुछ दिनों से अपर्णा यादव जिस तरह से आम जनता के बीच जाकर, छोटी दुकानों पर रुककर भाजपा के पक्ष में माहौल बना रही थीं, उसे इस एक घटना ने धक्का पहुंचाया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुलायम सिंह यादव की बहू होने के नाते अपर्णा से एक गंभीर राजनीतिक परिपक्वता की उम्मीद की जाती है। अब देखना यह है कि हाईकमान की इस नाराजगी के बाद अपर्णा और ऋतु शाही का अगला कदम क्या होता है और क्या वे पार्टी नेतृत्व को संतुष्ट कर पाती हैं।




