ट्रंप के एक साइन से बढ़ी भारत की चिंता! जेब पर पड़ेगी सीधी मार, जानें आपकी रोजमर्रा की चीजों पर कितना असर?

नई दिल्ली, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, इस कानून के तहत अब ट्रंप को रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है इस लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल है.

इस कानून का नाम ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ रखा गया है. इसे बीते अगस्त महीने में अमेरिकी सीनेट में भारी बहुमत से पास किया गया था, जहां इसके पक्ष में 86 विरोध में सिर्फ 11 वोट पड़े थे. अब शनिवार को व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर औपचारिक रूप से दस्तखत किए हैं.

इस कानून के निशाने पर कौन-कौन से देश हैं?

यह कानून खासतौर पर रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले पांच देशों को सीधे निशाने पर लेता है. इस सूची में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी अजरबैजान शामिल हैं. इसके अलावा यह कानून ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी सख्त बनाता है.

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत लगातार रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता आ रहा है. मौजूदा हालात में भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अकेले रूस से मंगा रहा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में भारत ने रोजाना करीब 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदा था. हालांकि जुलाई के मुकाबले यह आंकड़ा कुछ कम जरूर हुआ है, क्योंकि जुलाई में यह 28.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था.

क्या अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर बार टैरिफ लगाएंगे?

विदेशी नीति के जनकारों के मुताबिक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में उन देशों की समीक्षा करेंगे जो रूस से तेल-गैस खरीद रहे हैं. यानी यह कोई तुरंत लागू होने वाला टैरिफ नहीं है, बल्कि समय-समय पर आकलन के आधार पर फैसला लिया जाएगा. हालांकि खतरा बना रहेगा कि अगर हालात नहीं बदले तो टैरिफ की तलवार कभी भी लटक सकती है.

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भारत की तरफ से अब तक क्या प्रतिक्रिया आई है?

भारत ने इस मामले में अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि देश के राष्ट्रीय ऊर्जा हितों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा. इसके अलावा अगर अमेरिका के दबाव में भारत को रूस के सस्ते तेल की जगह महंगे विकल्पों की तरफ रुख करना पड़ा तो इसका सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ेगा. यहां बता दें कि तेल महंगा खरीदने का मतलब है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है जिससे आम आदमी की जेब पर सीधी मार पड़ने का खतरा है.

अभी भारत पर कितना टैरिफ लागू है कितना बढ़ सकता है?

फिलहाल अमेरिका ने भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है लेकिन अगर भारत रूसी तेल की खरीद जारी रखता है नया कानून लागू होता है तो यह आंकड़ा सीधे 100 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इतना बड़ा उछाल भारत के निर्यात कारोबार के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है.

भारत से अमेरिका को टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर उत्पाद, समुद्री उत्पाद केमिकल्स बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं. अगर टैरिफ बढ़ता है तो ये सभी उत्पाद अमेरिकी बाजार में काफी महंगे हो जाएंगे जिससे वहां के खरीदार बांग्लादेश, वियतनाम जैसे सस्ते विकल्पों की तरफ रुख कर सकते हैं. इसका सीधा असर भारत के निर्यातकों उनसे जुड़े लाखों कामगारों की आजीविका पर पड़ सकता है.

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