नितिन नबीन की सीट बांकीपुर में प्रशांत किशोर की प्रचंड जीत, BJP का 31 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

बांकीपुर , बिहार की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजों में बड़ा उलटफेर हो गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) बांकीपुर से जीत गए हैं। पीके 19 हजार से ज्यादा वोटों से जीते हैं।

ये सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के जाने से खाली हुई थी। 31 सालों से यहां भाजपा जीत रही थी लेकिन इस बार बाजी पलट गई है। नितिन नबीन को पीएम नरेंद्र मोदी अपना बॉस भी कहते हैं।

प्रशांत किशोर को कुल वोट 64 हजार से ज्यादा मिले हैं। वहीं बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार 44 हजार वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। RJD नेता रेखा कुमारी को कुल 14 हजार वोट मिले हैं। प्रशांत किशोर इस सीट से शुरुआत से लीड बनाए हुए हैं। उन्होंने एक भी राउंड में भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को आगे आने ही नहीं दिया है। ये प्रशांत किशोर की पहली चुनावी जीत है।

जीत पर क्या बोले प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता जनता के भरोसे पर खरा उतरना होगी। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद उनका पूरा ध्यान बांकीपुर के विकास पर रहेगा।

बांकीपुर के लोगों ने जिस भरोसे के साथ हमें समर्थन दिया है, सबसे पहले उस भरोसे का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। हम अपनी पूरी ताकत से इस इलाके के लिए काम करेंगे। मैं बड़े-बड़े दावे नहीं करना चाहता। सिर्फ विधायक बनने से बांकीपुर रातों-रात बेंगलुरु नहीं बन जाएगा। लेकिन अगले दो से तीन महीनों में लोगों को यहां बदलाव की शुरुआत जरूर दिखेगी।”

बीजेपी नेतृत्व को दिया राजनीतिक संदेश

प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के नतीजे सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं हैं, बल्कि यह बीजेपी नेतृत्व के लिए भी एक राजनीतिक संदेश है।

उन्होंने कहा,

“बांकीपुर की जनता ने बीजेपी नेतृत्व को साफ संकेत दिया है कि बिहार के लिए एक बेहतर मुख्यमंत्री का चेहरा सामने लाया जाए। अगर बीजेपी सम्राट चौधरी की जगह कुशवाहा समाज से किसी दूसरे नेता को जिम्मेदारी देना चाहती है, तो यह उनका अंदरूनी फैसला है। हमें उससे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जो भी चेहरा हो, वह ईमानदार, सक्षम और बिहार के विकास के लिए काम करने वाला होना चाहिए।”

31 साल का रिकॉर्ड टूटा

बांकीपुर विधानसभा सीट को बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। 1995 से इस सीट पर बीजेपी लगातार जीत दर्ज करती आई है। इस बार भी पार्टी को अपनी जीत का पूरा भरोसा था। लेकिन शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक तस्वीर बदल दी है।

यह उपचुनाव बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट पर कराया गया। 30 जुलाई को मतदान हुआ था। इस बार 34.30 प्रतिशत वोटिंग दर्ज हुई, जो पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 7 प्रतिशत कम रही।

200 किलो लड्डू अब चर्चा का विषय

मतगणना शुरू होने से पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाने के लिए 200 किलो लड्डू तैयार कराए थे। योजना थी कि नतीजे आते ही समर्थकों के बीच मिठाई बांटी जाएगी। लेकिन शुरुआती रुझानों में पार्टी पीछे जाती दिखी तो यही लड्डू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए। कई यूजर्स मजाकिया अंदाज में सवाल उठा रहे हैं कि अगर नतीजे नहीं बदले तो इन लड्डुओं का क्या होगा।

प्रशांत किशोर का पहला चुनाव क्यों खास है?

चुनाव रणनीतिकार के तौर पर राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर पहली बार खुद विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए बांकीपुर का यह मुकाबला सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता की भी बड़ी परीक्षा है। हाल के छात्र आंदोलनों के बाद हुए इस उपचुनाव को कई राजनीतिक विश्लेषक युवाओं के बदलते राजनीतिक रुझान से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर मतगणना पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

कौन-कौन मैदान में है?

इस उपचुनाव में कुल 26 उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया, जबकि आरजेडी ने रेखा कुमारी पर दांव लगाया। लेकिन अब तक के रुझानों में मुकाबला सीधे प्रशांत किशोर और बीजेपी के बीच दिखाई दे रहा है। फिलहाल ये सिर्फ मतगणना के रुझान हैं। अंतिम नतीजा सभी राउंड की गिनती पूरी होने के बाद ही घोषित होगा।

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