नई दिल्ली, लॉ की पढ़ाई का सपना देखने वाले युवाओं और ज्यादा उम्र के उम्मीदवारों के लिए एक राहत भरी खबर है. दरअसल बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी है कि उसने 3 और 5 वर्षीय लॉ डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन के लिए तय की गई ऊपरी आयु सीमा को पूरी तरह हटा दिया है.
इस अहम फैसले के बाद अब देश का कोई भी नागरिक अपनी उम्र की परवाह किए बिना, किसी भी आयु में कानूनी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और एलएलबी की पढ़ाई कर सकेंगे. इस लिमिट के हटने का सबसे ज्यादा फायदा उन उम्मीदवारों के लिए माना जा रहा था, जो एज लिमिट की वजह से अब तक वकालत की पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट में दी गई जानकारी
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस, जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बीसीआई की ओर से पेश वकील राधिका गौतम और दूसरी काउंसिल ने अदालत को अवगत कराया की बार काउंसिल की जनरल काउंसिल ने एक प्रस्ताव पारित कर आयु सीमा के प्रावधान को वापस ले लिया है. काउंसिल ने अदालत को बताया कि स्वतंत्र रूप से विचार करने के बाद जनरल काउंसिल इस निष्कर्ष पर पहुंची की प्रवेश के लिए लगाई जाने वाली अधिकतम आयु सीमा का कोई पर्याप्त शैक्षणिक औचित्य नहीं है. काउंसिल का मानना है कि पहले से मौजूद दूसरी योग्यताएं उपस्थिति, पढ़ाई के घंटे, परीक्षाएं और ट्रेनिंग के मानक कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है. इसलिए केवल उम्र के आधार पर किसी योग्य छात्र को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऋषभ दुग्गल व दूसरी आयु सीमा के खिलाफ दायर की गई उस याचिका का भी निपटारा कर दिया, जो पिछले कई सालों से अदालत में विचाराधीन थी.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लीगल एजुकेशन रूल्स 2008 के तहत 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए अधिकतम आयु सीमा 20 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 22 वर्ष तय की गई है. वहीं 3 वर्षीय एलएलबी कोर्स के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 साल तय की गई थी. वहीं बीसीआई ने सितंबर 2016 में एक सर्कुलर जारी कर इन आयु सीमाओं को फिर से बहाल कर दिया था, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. वहीं मार्च 2017 में शीर्ष अदालत ने इन आयु सीमाओं पर रोक लगा दी थी. इसके अलावा अलग-अलग हाई कोर्ट जैसे मुंबई और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में भी इन प्रावधानों को चुनौती दी गई थी, जहां इन्हें खारिज कर दिया गया था. जबकि कुछ दूसरी जगह इन्हें सही ठहराया गया था. इस अस्पष्टता को दूर करने के लिए यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था.
बीसीआई के फैसले के बाद अब देश भर के यूनिवर्सिटी और लॉ कॉलेज में 3 साल के एलएलबी कोर्स या 5 साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में एडमिशन लेने के लिए कोई उम्र की बाधा नहीं आएगी, जो युवा ग्रेजुएशन के बाद या जीवन के किसी भी पड़ाव पर कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं, वह अब बिना किसी रुकावट के लॉ कॉलेज में एडमिशन ले सकते हैं.




