लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पावर कॉरपोरेशन ने देर रात बिना उपभोक्ताओं से पूछे या उनकी सहमति लिए 46.79 लाख कनेक्शनों का लोड बढ़ा दिया। बिलिंग सॉफ्टवेयर में जिन उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उनमें से तकरीबन 50 प्रतिशत स्मार्ट मीटर कनेक्शन धारक हैं।
बिना सहमति के एक साथ इतनी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाने के खिलाफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोक महत्व (public importance) याचिका दाखिल करके हस्तक्षेप की मांग की है। उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाने के बाद उनके बिल में फिक्स्ड चार्ज बढ़ जाएगा और उनकी न्यूनतम देय राशि में भी इजाफा होगा। इस तरह से कुल मिलाकर अब उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल देना पड़ेगा।
उपभोक्ता परिषद ने टैरिफ स्थिर रहने के बाद लोड बढ़ाने को पर्दे के पीछे से ज्यादा राजस्व कमाने का जरिया बताया है। जिन उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उनमें वाणिज्यिक उपभोक्ता भी हैं। लोड बढ़ाते हुए इन उपभोक्ताओं से विद्युत सुरक्षा निदेशालय का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं लिया गया। विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा पूर्व में निर्गत एनओसी लोड में परिवर्तन के साथ ही निष्प्रभावी हो जाती है। ऐसे में सवाल हैं कि अगर भविष्य में इन उपभोक्ताओं के परिसर में किसी भी तरह की विद्युत दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? निदेशालय अपनी एनओसी प्रभावी न रह जाने पर पल्ला झाड़ेगा जबकि बिजली निगमों पर ही बिना एनओसी के लोड बढ़ाने की जिम्मेदारी आएगी। हाल ही में अलीगंज में हुए अग्निकांड में भी विद्युत सुरक्षा निदेशालय की एनओसी को लेकर ही पेच फंसा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग से याचिका में मांग की है कि बिना सूचना लोड बढ़ाने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
उन्होंने कहा है कि उपभोक्ताओं को सुना जाए और अगर कार्रवाई नियमों के विपरीत पाई जाए तो सभी के बढ़े हुए भार तत्काल पूर्ववत किए जाएं। याचिका में आयोग से पावर कॉरपोरेशन से स्पष्टीकरण तलब करके सार्वजनिक सुनवाई करने की मांग की गई है। स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता और रीडिंग की शुद्धता को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। बड़ी संख्या में उपभोक्ता अधिक खपत और तकनीकी खामियों की शिकायतें कर रहे हैं।
टैरिफ आदेश में स्थिति स्पष्ट
पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्यिक) प्रशांत वर्मा ने कहा कि टैरिफ आदेश में स्पष्ट है कि एक वित्तीय वर्ष में तीन बार लोड बढ़ने पर सबसे कम बढ़ा हुआ लोड नियमित किया जा सकता है। बिजली बिल में बढ़ा हुआ लोड दर्शाया जाता है, इससे यह नहीं कहा जा सकता है कि उपभोक्ताओं को पता नहीं है। हम उन्हें अन्य माध्यमों से सूचि भी कर रहे हैं।




