अस्पताल में डॉक्टर पर बेहोश करके रेप का आरोप, डिप्टी CM का चला हंटर!अस्पताल सील-लाइसेंस रद्द

लखनऊ, राजधानी लखनऊ में एक निजी अस्पताल में डॉक्टर पर महिला छात्रा के साथ बलात्कार का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोपी डॉक्टर ने कथित तौर पर इलाज के बहाने पीड़िता को बेहोश करने वाला इंजेक्शन दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

इस घटना ने पूरे प्रदेश में चिकित्सा पेशे की विश्वसनीयता और महिला सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

18 मई 2026 को सीतापुर जिले के तंबौर इलाके की रहने वाली एक युवा महिला छात्रा स्वास्थ्य समस्या के चलते लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित तेजस अस्पताल में भर्ती हुई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी डॉक्टर विजय गिरि ने इलाज के नाम पर पीड़िता को अकेले ऑपरेशन थिएटर में बुलाया।

डॉक्टर ने महिला स्टाफ और पीड़िता के पिता को बाहर जाने का निर्देश दिया। पीड़िता का आरोप है कि डॉक्टर ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन लगाया और उसके बाद उसके साथ बलात्कार किया। जब इंजेक्शन का असर कम हुआ तो पीड़िता को घटना का अहसास हुआ। इसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस उपायुक्त (उत्तर) ट्विंकल जैन ने पत्रकारों को बताया कि पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी डॉक्टर विजय गिरि को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जो स्वास्थ्य विभाग का प्रभार भी संभाल रहे हैं, ने इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि तेजस अस्पताल को सील करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

पाठक ने आगे बताया:

  • आरोपी डॉक्टर विजय गिरि का मेडिकल लाइसेंस तत्काल निलंबित किया जाए।
  • उनकी आयुर्वेदिक मेडिकल डिग्री जब्त की जाए।
  • उन्हें भविष्य में कभी भी चिकित्सा व्यवसाय करने की अनुमति न दी जाए।

सरकार की इस तेज प्रतिक्रिया को सराहा जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में पाठक ने साफ संदेश दिया है कि चिकित्सा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस जांच की स्थिति

पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है। अस्पताल के स्टाफ से पूछताछ, CCTV फुटेज की जांच और मेडिकल रिपोर्ट्स का विश्लेषण किया जा रहा है। डॉक्टर विजय गिरि आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं और तेजस अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि सभी सबूतों के आधार पर चार्जशीट तैयार की जाएगी। मामले में IPC की धारा 376 (बलात्कार) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

चिकित्सा नैतिकता पर सवाल

यह घटना चिकित्सा पेशे में नैतिकता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है:

  • निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कितना मजबूत है?
  • महिला मरीजों के इलाज के दौरान महिला स्टाफ की अनिवार्य मौजूदगी क्यों नहीं सुनिश्चित की जाती?
  • क्या मेडिकल शिक्षा में नैतिकता (Medical Ethics) पर पर्याप्त जोर दिया जा रहा है?

देशभर में समय-समय पर डॉक्टरों के खिलाफ यौन शोषण के मामले सामने आते रहे हैं। यह घटना मरीज-डॉक्टर के बीच के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाती है।

कानूनी पहलू क्या है?

भारतीय कानून में बलात्कार के मामले में सख्त सजा का प्रावधान है। अगर आरोप साबित हुआ तो आरोपी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। साथ ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और आयुर्वेद बोर्ड के नियमों के तहत डॉक्टर के लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है।

समाज पर असर

यह मामला युवा छात्राओं और महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ा रहा है। खासकर निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीज अब सतर्क हो गए हैं। सरकार को इस घटना से सबक लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में सख्त गाइडलाइंस जारी करने की जरूरत है।

आगे क्या?

  • पुलिस की जांच रिपोर्ट और कोर्ट में सुनवाई।
  • अस्पताल पर प्रशासनिक जांच।
  • पीड़िता को न्याय और सुरक्षा मुहैया कराना।
  • पूरे स्वास्थ्य विभाग में नैतिकता जागरूकता अभियान।

लखनऊ का तेजस अस्पताल मामला चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक बड़े सबक की तरह है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा अस्पताल सील करने और डॉक्टर की डिग्री जब्त करने का कदम सराहनीय है। अब जरूरी है कि पुलिस निष्पक्ष और तेजी से जांच पूरी कर दोषी को सजा दिलाए। महिलाओं की सुरक्षा और चिकित्सा पेशे की गरिमा दोनों को बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिले, यही इस वक्त सबसे बड़ी मांग है।

Related Posts