पीएम किसान सम्मान निधि में फ़र्ज़ीवाड़ा : तीन लाख फर्जी किसानों से होगी वसूली, कृषि विभाग ने पुलिस को सौंपी लिस्ट

प्रतापगढ़, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में 60 करोड़ से अधिक गबन मामले में साइबर थाने में एक अज्ञात आरोपित पर केस दर्ज कराने के बाद जनपद में खलबली मची गई है। पुलिस को तीन लाख से अधिक अपात्रों के नाम की सूची भी सौंपी गई है।

 

सूची में सबसे ज्यादा अपात्र कुंडा तहसील के हैं तथा 60 प्रतिशत बाहरी हैं। अब गलत ढंग से सरकारी पैसा हजम करने के आरोपितों को किसान सम्मान निधि लौटानी होगी। इस प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को मिल सकती है। बड़ा आर्थिक अपराध होने के कारण इस पर सभी की नजर भी है।

दूसरे जिलों के लोगों को भी नाम

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में गड़बड़ी की जांच के दौरान सामने आया कि 3,18,846 अपात्र लाभार्थियों की सूची में सबसे अधिक नाम कुंडा तहसील के हैं। सूची में शामिल करीब 60 प्रतिशत लाभार्थी जिले के बाहर के हैं। इनमें दूसरे जिलों के लोगों के नाम भी शामिल हैं।

योजना के तहत इन लोगों का पंजीकरण किस स्तर पर और किस आधार पर किया गया, इसकी जांच अब साइबर थाना करेगा। कृषि विभाग ने अपात्र लाभार्थियों की सूची पुलिस को उपलब्ध करा दी है। अब इनके खातों में भेजी गई धनराशि की पड़ताल कर सरकारी धन की वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी।

चार साल पहले कुंडा तहसील में योजना की लॉगइन, आईडी का दुरुपयोग करके सरकारी पोर्टल के विकल्प डायरेक्ट एंट्री के जरिए जालसाजों ने बड़े पैमाने पर खेल किया था। इसमें नाबालिग और अन्य अपात्रों का पंजीकरण इस सरकारी योजना में करवा दिया गया था।

पहले पीएम किसान पंजीकरण तहसील से अग्रसारित होकर जनपद कार्यालय की लॉगइन पर प्राप्त होता था। चार साल पहले कृषकों की सुविधा के लिए सरकार ने तहसीलों पर डायरेक्ट एंट्री का विकल्प उपलब्ध कराया दिया था। इसी में शातिरों ने सेंध लगाई।

इसकी जांच तहसील प्रशासन से लेकर विजिलेंस तक ने की। बाद में शासन स्तर पर जांच होने व गड़बड़ी की पुष्टि होने पर सख्ती शुरू हुई। शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने इस गंभीर प्रकरण में आरोपितों पर एफआईआर दर्ज करने को कहा। एसपी को पत्र भी लिखा था।

उप कृषि निदेशक अश्वनी कुमार सिंह ने दर्ज कराए केस में कहा है कि अब तक 60 करोड़ रुपये से अधिक के दुरुपयोग की आशंका है। इसमें कई लोग शामिल हैं। पुलिस को 3,18,846 अपात्रों की सूची पेन ड्राइव में सौंपी गई है।

एएसपी आलोक कुमार का कहना है कि कृषि विभाग की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। संबंधित अभिलेखों की जांच करके कार्रवाई की जाएगी।

पंजीकरण तो हुए, लेकिन सभी के खाते में नहीं गए पैसे

पीएम किसान सम्मान निधि में बड़ी संख्या में अपात्रों का पंजीकरण तो कराया गया, लेकिन सभी के खातों में योजना की धनराशि नहीं पहुंची। जांच में 3,18,846 अपात्र पंजीकरण सामने आए हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनके नाम पोर्टल पर दर्ज हुए, लेकिन सत्यापन अथवा अन्य कारणों से भुगतान नहीं हो सका।

वहीं, जिन अपात्रों के खातों में सम्मान निधि की रकम पहुंची है, उनसे सरकारी धन की वसूली की तैयारी है। कृषि विभाग अब लाभार्थियों के पंजीकरण, भुगतान और खातों से संबंधित अभिलेखों का मिलान कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद वास्तविक नुकसान का आंकड़ा स्पष्ट होगा।

एक दिन में औसतन तीन हजार की हुई थी फर्जी इंट्री

पीएम किसान सम्मान निधि में फर्जी पंजीकरण का खेल बड़े पैमाने पर हुआ था। जांच में सामने आया कि डायरेक्ट एंट्री के माध्यम से एक दिन में औसतन तीन हजार तक पंजीकरण किए गए। उस समय पंजीकरण की व्यवस्था ओटीपी आधारित थी, जिसका कथित रूप से दुरुपयोग कर अपात्र लोगों के नाम योजना में दर्ज कराए गए। कुंडा तहसील में बड़ी संख्या में ऐसे पंजीकरण होने के बाद मामला जांच के दायरे में आया। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव करते हुए आधार आधारित सत्यापन और बायोमीट्रिक प्रक्रिया को लागू किया गया। अब साइबर थाना पुराने पंजीकरणों और लॉगइन गतिविधियों की जांच करेगा।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में करोड़ों के हुए फर्जीवाड़े की जांच साइबर थाने की चार टीमों द्वारा की जाएगी। पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि जिस आईडी से लॉगइन हुई उसके इंटरनेट प्रोटोकाल (आईपी) एड्रेस को तकनीकी टीमों द्वारा खंगालकर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इस जांच की मानिटरिंग का जिम्मा अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आईपीएस आलोक कुमार को दिया गया है।

बड़ा हो जाएगा जांच का दायरा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में करोड़ों की घपलेबाजी की जांच जल्दी ही पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) लखनऊ को मिल सकती है। यह पुलिस की एक विशेष इकाई होती है, जो धोखाधड़ी, गबन, बैंक धोखाधड़ी और बड़े वित्तीय घोटालों जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों की जांच करती है।

जल्द ही साइबर थाने की रिपोर्ट को इस जांच एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। आगे की जांच वही करेगी। पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर का कहना है कि बड़े आर्थिक अपराध की जांच की पुलिस की सीमाएं सीमित हैं। यह बड़ा आर्थिक अपराध का केस है, इसलिए इसे ईओडब्ल्यू को जल्दी ही भेजा जाएगा।

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