अंततः बिहार भी हुआ भगवामई, पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी बने CM, विजय चौधरी और विजेंद्र यादव डिप्टी सीएम

पटना, सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. आज सुबह पटना के लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. यह बिहार के इतिहास में पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से कोई नेता मुख्यमंत्री पद संभाल रहा है.

सोमवार को जनता दल यूनाइटेड के चीफ नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, उन्होंने सम्राट चौधरी को जिम्मेदारी सौंपते हुए बिहार के बहतर कल की उम्मीद जताई है.

शपथ ग्रहण के मौके पर कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिनमें BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, JD(U) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (उर्फ ललन सिंह), केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, RLM के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और LJP के सांसद अरुण भारती शामिल थे. सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने हैं.

JDU से बने दो उपमुख्यमंत्री

इस मौके पर JDU कोटे से दो उपमुख्यमंत्री ने भी शपथ ली है. JDU से विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है, बिहार की राजनीति में यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है. मंगलवार को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया. शपथ ग्रहण से पहले से ही पटना की सड़कों पर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई के बैनर नजर आ रहे हैं. अब नई सरकार के गठन के साथ बिहार में विकास और सुशासन पर नया फोकस होने की उम्मीद है.

तीनों नेताओं में यह है समानता

राज्य के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और JDU के दो मुख्यमंत्री विजेंद्र यादव और विजय चौधरी के बीच एक खास समानता है. दरअसल, एक तरफ जहां सम्राट चौधरी कई पार्टियों में रहते हुए बीजेपी में आए थे, वहीं दूसरी तरफ विजय चौधरी और विजेंद्र यादव भी दूसरे दलों में रह चुके हैं. इन दोनों नेताओं ने भी दूसरी पार्टियों से अपने राजनीतिक सफर शुरू किया था. सम्राट चौधरी ने जहां RJD से अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी और हम पार्टी तथा जदयू में रहते हुए भाजपा में आए.

वहीं, दूसरी तरफ विजय चौधरी ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी. हालांकि, बाद में वह जनता दल यूनाइटेड में चले आए और सीएम नीतीश कुमार के करीबी बन गए. इसी प्रकार विजेंद्र प्रसाद यादव ने अपना राजनीतिक सफर 1990 में शुरू किया था. जब वह पहली बार सुपौल विधानसभा सीट से जीतकर सदन में पहुंचे थे.

1990 में विजेंद्र यादव ने तत्कालीन जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता था. 1990 में जब लालू प्रसाद यादव का कार्यकाल शुरू हुआ तो उन्हें 1991 में ऊर्जा राज्य मंत्री बनाया गया था. 1997 में जब जनता दल में विभाजन हुआ, तब शरद यादव और लालू प्रसाद के दो अलग-अलग गुट बन गए थे. तब विजेंद्र यादव ने शरद यादव का का चुनाव किया तब से वह JDU में ही है.

4 सदनों के नेता बने नीतीश

नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ राज्यसभा चले गए हैं. उनका बिहार से जाना एक युग का अंत माना जा रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह अपना मार्गदर्शन देते रहेंगे. नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वे बिहार के छठे ऐसे नेता बन गए हैं, जिन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा – इन चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है.

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