सावधान!! आ गया अल नीनो! मौसम विभाग ने जारी की बड़ी चेतावनी, जानें आपके इलाके पर क्या होगा असर

नई दिल्ली, मौसम वैज्ञानिकों की वो भविष्यवाणी सच साबित हो गई. कंफर्म हो गया कि अल नीनो आ गया है. दूसरी ओर मॉनसून भी यूपी-बिहार पहुंचने के बाद दिल्ली आने वाला है.

मॉनसून के बीच अल नीनो के आने का आप पर क्या असर पड़ेगा, आइए जानते हैं.

जून का महीना लगने के पहले ही मॉनसून और उसे मजबूत बनाने वाले लानीना या फिर कमजोर करने वाले अल नीनो की चर्चा होने लगती है. इससे यह बात पता चलती है कि ‘सावन’ यानी इस सीजन में बारिश कैसी होगी? किसान-मजदूर ही नहीं, सूरज की प्रचंड धूप से परेशान लोग आसमान की ओर ताकने लगते हैं.

इसी समय ‘काले मेघा-काले मेघा पानी तो बरसाओ, बिजली की तलवार नहीं बूदों के बाण चलाओ’ जैसी धुन कानों को सुहाने लगती हैं. कुल मिलाकर जब चारों ओर बारिश का इंतजार हो रहा होता है, उसी दौरान मौसम का मूड पहचानने के लिए वैज्ञानिक की टोलियां समंदर के गर्भ में चल रही कई हलचल को पढ़ रही होती हैं, जिनसे अंदाजा लगता है कि भारत का मानसून कैसा रहेगा.

तो वैज्ञानिकों ने करीब महीनेभर पहले जो अनुमान लगाया था कि इस बार अल नीनो आ रहा है, इसलिए मॉनसून कमजोर होगा, अब उसकी पुष्टि हो गई है. अब ये भी जान लेते हैं कि इसका आप पर क्या असर होगा.

अल नीनो को जानिए

बारिश का अनुमान दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर महासागरों का तापमान देखकर लगाया जाता है. ले मैन लैंग्वेज में कहें तो जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म होने लगता है, तो उस मौसम परिस्थिति को अल नीनो कहा जाता है.

यही अल नीनो दुनिया के कई देशों के मौसम को प्रभावित करता है. भारत के लिए, ऐतिहासिक रूप से इसका संबंध कमजोर मॉनसून बारिश, ज्यादा तापमान, लंबे समय तक सूखे और कुछ सालों में सूखे के बढ़ते जोखिम से रहा है.

मंथली वेदर बुलेटिन में आई बुरी खबर

शुक्रवार को जारी अपने मंथली वेदर बुलेटिन में, मौसम विभाग (IMD) ने कहा कि इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) जो कि भारतीय भू-भाग में बारिश को प्रभावित करने वाला एक अहम क्लाइमेट पैटर्न है, उसमें मॉनसून सीजन के अंत तक न्यूट्रल स्थितियां बनी रहने की उम्मीद है.

इसके साथ ही मौसम विभाग (IMD) ने आधिकारिक तौर पर भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो स्थितियों की शुरुआत की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी है कि चल रहे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान अल नीनो यानी जलवायु घटना के और मजबूत होने की संभावना है.

जून 2026 के ENSO और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) बुलेटिन में, IMD ने कहा कि मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान अल नीनो स्थितियों के लिए जरूरी सीमा को पार कर गया है. सबसे अहम बात ये कि वैज्ञानिकों ने वातावरण के साथ-साथ समंदर के गर्म होने पर प्रतिक्रिया दी, जिससे पता चला कि समुद्री-वायुमंडल का जुड़ा सिस्टम अब पूरी तरह से अल नीनो की स्थिति में आ चुका है.

और मजबूत होगा अल नीनाो

IMD ने ताजा बुलेटिन में कहा, ‘फिलहाल, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो स्थितियां मौजूद हैं और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान इनके और मजबूत होने की उम्मीद है. मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) द्वारा किए गए पूर्वानुमान बताते हैं कि जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ेगा, अल नीनो के और तेज होने की संभावना है.

बुलेटिन के मुताबिक, जून 2026 में मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान अल नीनो की सीमा से भी ऊपर चला गया.
इसकी निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मुख्य संकेतक, लेटेस्ट 3 महीने का औसत नीनो 3.4 इंडेक्स +0.5°C से ऊपर बढ़ गया है, जो अल नीनो स्थितियों की आधिकारिक शुरुआत का संकेत है.

पीएम मोदी ने नीति आयोग की बैठक में अल नीनो से सतर्क रहने की अपील की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल-नीनो से जुड़े खतरों के बारे में चेतावनी देते हुए जल संरक्षण के लिए और मजबूत कदम उठाने की बात कही थी.

क्या मिलेगी आंशिक राहत?

वहीं एमएमसीएफएस प्लूम और प्रॉबेबिलिटी फोरकास्ट यह संकेत देते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मॉडरेट से स्ट्रॉन्ग अल नीनो की स्थिति बन सकती है. वहीं, भारतीय महासागर में न्यूट्रल आईओडी के मानसून के आखिर तक बने रहने की संभावना जताई गई है.

जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) जिसने 11 जून को आधिकारिक तौर पर अल नीनो की शुरुआत की घोषणा की थी ने भारत के लिए एक संभावित सकारात्मक पहलू की ओर इशारा किया. एजेंसी ने कहा कि जुलाई के आसपास पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) विकसित हो सकता है, जो देश में मॉनसून की बारिश पर ‘सुपर अल नीनो’ के संभावित प्रतिकूल प्रभावों को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है.

आपके इलाके में क्या असर होगा?

इसका आम आदमी के लिए क्या मायने हैं, ये बताएं तो फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत जरूर है. पीएम मोदी ने भी यही कहा है. फिलहाल अल नीनो मजबूत होने की ओर बढ़ रहा है, जिससे बारिश में कमी आ सकती है.

बारिश में कमी आएगी तो सूखे की वजह से फसल खराब हो सकती है, फसल खराब होगी तो महंगाई बढ़ सकती है. चिंता की बात यही है कि आईओडी न्यूट्रल है, यानी भारतीय महासागर की तरफ से फिलहाल कोई अतिरिक्त मदद मिलने के संकेत नहीं हैं.

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