बिधूना, (औरय्या) खांसी की दवा दिलाने ले जाए गए डेढ़ वर्षीय मासूम की मंगलवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सराय प्रथम स्थित एक झोलाछाप द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई।
घटना की सूचना स्वास्थ्य विभाग को मिली तो देर शाम डिप्टी सीएमओ डॉ. मनोज कुमार संबंधित क्लीनिक पर पहुंचे और प्रारंभिक जांच के बाद क्लीनिक को सीज कर दिया। गांव कैथावा निवासी मजदूर मोहम्मद मुक्की मंगलवार दोपहर अपने डेढ़ वर्षीय बेटे फैज मंसूरी को खांसी की शिकायत पर सराय प्रथम गांव स्थित एक निजी क्लीनिक पर ले गया था।
परिजनों के अनुसार मौजूद चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद ही मासूम की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधूना ले गए, जहां मौजूद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने क्लीनिक पर गलत इलाज का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, स्थिति को नियंत्रण में लिया और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कोतवाल मुकेश चौहान ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मृत्यु का कारण स्पष्ट होगा। फिलहाल परिजनों द्वारा कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई है। फैज अपने माता का इकलौता बेटा था। घटना के बाद पूरे परिवार, विशेषकर मां साबरीन का रो-रोकर बुरा हाल रहा। ग्रामीणों व अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई। अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई पर उठ रहे सवाल क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध अस्पतालों व क्लीनिकों पर कार्रवाई की सुस्त रफ्तार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आएदिन झोलाछापों के इलाज से मरीज की हालत बिगड़ने और मौत के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अक्सर औपचारिकता तक सीमित दिखाई देती है। बीते शनिवार को कस्बा स्थित ‘द केयर हॉस्पिटल’ में गलत इलाज का आरोप लगने पर अस्पताल सीज किया गया था और दो बिना पंजीकरण पैथोलॉजी सेंटर भी सीज किए गए थे, इसके बावजूद कई क्लीनिक आज भी खुलेआम संचालित हैं। डिप्टी सीएमओ एवं झोलाछाप के नोडल अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि शिकायत मिली थी, इसलिए टीम भेजी गई और क्लीनिक को सीज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आगे भी ऐसी शिकायतों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।




