Ishq Karo Party: बन गयी एक और नई पार्टी, ‘इश्क करो पार्टी’ क्या इसने बढ़ाई कॉकरोच ब्रिगेड की टेंशन! कौन हैं मार्कंडेय काटजू?

नई दिल्ली, कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब देश में नई पार्टी का आगाज होने जा रहा है, जिसका नाम सुनकर लोग हैरान भी हैं और मुस्कुरा भी रहे हैं, दरअसल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले मार्कंडेय काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ लॉन्च करके लोगों को एक नई बहस का भी मौका दे दिया है।

आज सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए काटजू ने युवाओं को अपनी पार्टी से जुड़ने का निमंत्रण दिया है, उन्होंने कहा कि ‘समाज में नफरत और टकराव की राजनीति के बजाय प्रेम, संवाद और भाईचारे को बढ़ावा देने की जरूरत है इसलिए मैं ‘इश्क करो पार्टी’ की घोषण करता हूं , जिसका स्लोगन है – Make Love, Not War यानी कि ‘युद्ध नहीं, प्यार करो’

काटजू ने एक्स पर यह जानकारी साझा की और कहा कि इच्छुक लोग जुड़ने के लिए ईमेल का उपयोग कर सकते हैं। पार्टी का ईमेल एड्रेस ishqkaroparty@gmail.com है। काटजू खुद इस नई पार्टी के संरक्षक बने हैं। काटजू ने बताया कि पार्टी के चेयरमैन इरफान अली हैं जो कि अमेरिका के न्यू जर्सी के रहने वाले हैं।

पार्टी की वेबसाइट बहुत जल्द बनाई जाएगी

काटजू के मुताबिक पार्टी की वेबसाइट बनाई जा रही है। इसका इंस्टाग्राम पेज भी तैयार किया जा रहा है। फिलहाल पार्टी का कोई औपचारिक घोषणापत्र जारी नहीं किया गया है।

कौन हैं मार्कडेय काटजू?

मार्कडेय काटजू भारत के मशहूर कानूनविद और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं। वे 2011 से 2014 तक प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन भी रहे है, वे राजनेता शिव नाथ काटजू के बेटे और कैलाश नाथ काटजू के पोते हैं। वे ‘इंडियन रीयुनिफिकेशन एसोसिएशन’ (IRA) के संस्थापक और संरक्षक भी हैं।

मार्कडेय काटजू का जन्म यूपी के लखनऊ में हुआ

20 सितंबर 1946 को लखनऊ में एक कश्मीरी हिंदू परिवार में जन्मे मार्कडेय काटजू ने 1967 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय LL.B. किया है। इसके बाद उन्होंने 1970 से 1991 तक इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत की। उन्हें लेबर लॉ, टैक्स से जुड़े मामलों और रिट याचिकाओं में महारत हासिल थी। उन्होंने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लिए स्टैंडिंग काउंसिल के तौर पर भी काम किया। 1991 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का जज बनाया गया और अगस्त 2004 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक्टिंग चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया।

‘डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी’ से सम्मानिकत हो चुके हैं काटजू

काटजू को नवंबर 2004 में मद्रास हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस और अक्टूबर 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। इसके बाद अप्रैल 2006 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया, जहां से वे 19 सितंबर 2011 को रिटायर हुए; इस तरह उन्होंने लगभग 20 साल तक न्यायपालिका में सेवा दी।

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प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन भी रहे काटजू

बाद में उन्होंने तीन साल तक प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन के तौर पर काम किया। उन्हें उनकी किताब ‘मीमांसा रूल्स ऑफ़ इंटरप्रिटेशन’ के लिए लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से ‘डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी’ (ऑनरिस कॉसा) की उपाधि से सम्मानित किया गया था। काटजू को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से कानून में मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी जा चुकी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

काटजू की नई पार्टी के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की बहस छिड़ गई है। एक और कुछ लोग इसे कॉकरोच के खिलाफ नई पार्टी खड़ी करने की सोची समझी स्कीम बता रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर एक वर्ग ऐसा है जो कि पार्टी के नाम पर जमकर मजे ले रहा ह।

नई पार्टी और विवाद

बीते शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया था। उनका मुख्य मुद्दा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। सीजेपी का नेतृत्व अभिजीत दीपके कर रहे हैं। एक तरफ व्यवस्था के खिलाफ कॉकरोच क्रांति की बात है, तो दूसरी तरफ ‘मेक लव, नॉट वॉर’ का संदेश। सवाल यह है कि युवाओं को ज्यादा आकर्षित कौन करेगा? आपकी राय इस खबर पर क्या है, कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताएं।

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