जानिए क्या है प्रधानमंत्री मोदी की 7 अपील का राज़, जानिए विदेशी मुद्रा भंडार कब होता है प्रभावित?

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नागरिकों से यह अपील की है कि वे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के लिए सात उपाय करें. इन सात उपायों में एक साल के लिए सोने की खरीद को टालना, एक साल के लिए विदेश यात्रा को टालना, खाद्य तेलों की खपत को घटाना, वर्क फ्राॅम होम के काॅन्सेंप्ट पर काम करना शामिल है.

पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर देश में विदेशी मुद्रा का भंडार कम ना हो, इसके लिए पीएम मोदी ने नागरिकों से सात अपील की है. देश में पेट्रोल-डीजल की खपत अगर इसी प्रकार बनी रही, तो सरकार को सप्लाई और डिमांड का गणित सही करना होगा. कच्चे तेल की कीमत वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत में वृद्धि नहीं की है. इसका अर्थ यह है कि सरकार महंगे दर पर तेल खरीदकर उसे सस्ते में बेच रही है. अगर यही स्थिति रही तो सरकार का विदेशी मुद्रा भंडार खतरे में आ सकता है. पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ा है. विश्व में भारत, सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. चूंकि भारत सोने की खरीद डाॅलर में करता है, इसलिए फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है. इसी वजह से प्रधानमंत्री ने यह अपील की है अगले एक साल तक सोना ना खरीदें.

विदेश मुद्रा भंडार और पीएम मोदी की अपील के बीच क्या लिंक है?

प्रधानमंत्री मोदी ने जिन चीजों का जिक्र अपने भाषण में किया है उन्हें भारत बड़ी मात्रा में इंपोर्ट करता है. इसका अर्थ यह हुआ कि इन चीजों के विश्व में हम सबसे बड़े खरीदार हैं.यहां समझने वाली बात यह है कि
जब भारतीय देश के बाहर से सामान खरीदते हैं, तो सौदा भारतीय रुपए में नहीं बल्कि डॉलर में होता है. डॉलर की खरीद के लिए भारतीय रुपए का प्रयोग होता है. इस स्थिति में रुपया कमजोर होता जाता है. इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जब देश में डॉलर आता है, तो रुपया मजबूत होता है और जब देश में डॉलर की मांग बढ़ती है, तो रुपया कमजोर होता है. अगर ऐसी सिचुएशन लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके दो असर होते हैं- एक, विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होता है और दूसरा, जब ऐसा हो रहा होता है, तो रुपया कमजोर होता है. यानी रुपए का मूल्य घटता जाता है.

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