पटना, बिहार की राजनीति इस समय उस चौराहे पर खड़ी है, जहां हर एक कदम एक नई कहानी लिख रहा है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जैसे ही दिल्ली में राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली, पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
एक तरफ जहां शपथ ग्रहण की तस्वीरें सुर्खियां बटोर रही थीं, वहीं दूसरी तरफ नीतीश के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार विजय चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयानों ने पूरे राज्य में सस्पेंस का ऐसा माहौल बना दिया है कि हर कोई पूछ रहा है – ‘आखिर बिहार में चल क्या रहा है?’
तेजस्वी का ‘अटैकिंग मोड’: चुनाव से पहले की भविष्यवाणी
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस समय पूरी तरह आक्रामक मूड में हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो हमने चुनाव के वक्त कहा था, वही सच हो रहा है। तेजस्वी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहना ही नहीं चाहते थे, बल्कि भाजपा ने उन पर यह पद थोपा था। तेजस्वी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जनता जिसे मुख्यमंत्री देखना चाहती है, वह बन नहीं रहा है।
कभी कोई नीतीश जी का हाथ पकड़ता है, कभी कुर्ते खींचता है। सदन में उनकी लाइन काट दी जाती है। यह कैसा अपमान है?” तेजस्वी का दावा है कि बिहार की स्थिति बद से बदतर हो गई है और सरकार केवल अपनी कुर्सी बचाने में जुटी है।
विजय चौधरी की ‘इस्तीफा’ वाली पहेली: सस्पेंस अब भी बरकरार
एक तरफ विपक्ष हमलावर है, तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार के करीबी मंत्री विजय चौधरी ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने ‘नई सरकार’ की अटकलों को हवा दे दी है। दिल्ली से लौटते ही एयरपोर्ट पर उन्होंने मीडिया से कहा, “शपथ ग्रहण से खबर नहीं बनती, नई सरकार तो इस्तीफा देने के बाद बनती है।” चौधरी के इस एक जुमले ने राजनीतिक पंडितों को उलझा दिया है। क्या नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर किसी और के लिए रास्ता साफ करेंगे? चौधरी ने मुस्कुराते हुए सिर्फ इतना कहा- “अभी इंतजार कीजिए, समय आने दीजिए।”
कैबिनेट की बैठक और बीजेपी की रद्द हुई मीटिंग का रहस्य
बिहार में राजनीतिक अनिश्चितता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीनों से कोई कैबिनेट मीटिंग नहीं हुई है। तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा कि आखिर बीजेपी की कोर कमेटी की मीटिंग क्यों रद्द हुई? उनका आरोप है कि एनडीए ने “तंत्र-मंत्र और मशीन तंत्र” के जरिए सरकार तो बना ली, लेकिन खजाना खाली है और बेरोजगारी चरम पर है। तेजस्वी ने किसानों की फसल बर्बादी और पलायन के मुद्दों पर भी सरकार को जमकर घेरा।
‘बिहार विल मिस यू’: जीतन राम मांझी का इमोशनल दांव
इस पूरे ड्रामे के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के एक पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने नीतीश कुमार को शपथ की बधाई न देते हुए लिखा- “बिहार विल मिस यू नीतीश जी।” मांझी का यह बयान संकेत दे रहा है कि बिहार की सत्ता में नीतीश कुमार का युग अब शायद समापन की ओर है और वे जल्द ही दिल्ली की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने वाले हैं।
बिहार की सियासत अब उस मोड़ पर है जहां ‘शपथ’ से ज्यादा चर्चा ‘इस्तीफे’ की हो रही है। अगले कुछ दिन बिहार की सत्ता संरचना के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।




