राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान से मांगा इस्तीफा, कहा- शिक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल, CBSE 12वीं बोर्ड के पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी का मुद्दा

नई दिल्ली। सीबीएसई की 12वीं के पेपरों की ओएसएम प्रणाली से जांच के पूर्नमूल्याकंन की तकनीकी खामियों और इसकी वजह से लाखों छात्रों के रिजल्ट पर पड़े प्रतिकूल असर से परेशान बच्चों के मुद्दे उठाते हुए कांग्रेस ने सरकार पर तगड़ा हमला बोलते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सीबीएसई की गड़बड़ी से प्रभावित छात्रों के भविष्य को अधर में डाले जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं।

18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी- और एक हफ्ते से ओएसम, गलत मार्किंग और जांच की गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं।

सीबीएसई की खामियों का मुद्दा उठाने वाले बच्चों को एक वर्ग द्वारा पाकिस्तानी बताए जाने पर तीखा वार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जेन जी ही सरकार का अहंकार तोड़ेगा।

राहुल गांधी ने CBSE पर उठाए सवाल

सीबीएसई की ओर से पुर्नमूल्यांकन के लिए दिए जा रहे पेपर में मार्किंग को लेकर सामने आ रही गंभीर त्रुटियों के खिलाफ सोशल मीडिया प छात्रों तथा उनके अभिभावकों की शिकायतों की बाढ़ और आक्रोश के मद्देनजर नेता विपक्ष तथा कांग्रेस ने सोमवार को इस मामले को प्रमुखता से उठाया।

राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में कहा, ‘मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया। दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। एक 17 साल का बच्चा जिसकी कॉपी गलत जांची गई, न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया। मगर, उसे मदद नहीं, गालियां मिलीं।’

राहुल गांधी ने आगे लिखा, ‘भाजपा के आईटी सेला ने उसे देशद्रोही और सोरोस का एजेंट तथा डीप स्टेट का हिस्सा कहा। एक 17 साल का बच्चा अपने भविष्य के लिए आवाज उठाता है और भाजपा उसे देशद्रोही बना देती है। सच यह है मोदी सरकार युवाओं और जेन-जी से डरती है क्योंकि वो अब सवाल पूछ रहे हैं और जो सवाल पूछे, उसे यह सरकार बदनाम करती है, डराती है, कुचलती है। पर सुन लीजिए मोदी जी यही युवा, यही जेन-जी आपका अहंकार तोड़ेगा।’

कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने वहीं इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा कि सीबीएसई ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसम) प्रणाली शुरू की थी, जिसने पूरे देश में लाखों बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को अधर में डाल दिया है। इससे पास परसेंटेज अभूतपूर्व रूप से तीन प्रतिशत गिर 88 से घटकर 85 रह गया है। पूरी प्रक्रिया अनियमितताओं से भरी पड़ी हैं।

धुंधली और अपठनीय उत्तर पुस्तिकाएं, गलत मूल्यांकन, छात्रों के साथ गलत उत्तर पुस्तिकाओं का जोड़ा जाना, भुगतान में देरी, और छात्रों से अत्यधिक पुनर्मूल्यांकन शुल्क की मांग जैसी गंभीर खामियां हैं।

जयराम रमेश ने कहा, ‘अब शिक्षा मंत्री जो पूरी संस्थागत व्यवस्था के पतन की अगुवाई कर रहे हैं इस त्रासदी के सामने आने के एक सप्ताह से बाद जागे हैं पर असली सवाल यह है कि इन समस्याओं का पहले अनुमान क्यों नहीं लगाया गया? ओएसएम प्रणाली को अपनाने से पहले सीबीएसई और मंत्रालय ने सावधानीपूर्वक योजना क्यों नहीं बनाई?’

जयराम रमेश ने पूछा, ‘इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में मंत्री को इतना समय क्यों लगा? शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगते हुए जयराम ने कहा कि वे अपनी अक्षमता से खुले तौर परछात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।’

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