जब दिन में छा जायेगा अंधेरा, जानिए कब और कैसा होगा नज़ारा

नई दिल्ली, आमतौर पर पूर्ण सूर्यग्रहण हर कुछ वर्षों या महीनों के अंतराल पर होते रहते हैं, लेकिन 21वीं सदी का अब तक का सबसे लंबा सूर्यग्रहण लगने वाला है.

यह अपनी अवधि को लेकर अलग ही वैज्ञानिक महत्त्व रखने वाला है. साल 2027 में दुनिया एक ऐसी खगोलीय घटना का गवाह बनेगी जब 6 मिनट 23 सेकेंड के लिए दिन में ही रात हो जाएगी. अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ और अंतरिक्ष प्रेमी अभी से इस तारीख को लेकर काफी उत्साहित हैं और तैयारियों में भी जुट गए हैं. खगोलविदों के अनुसार 2 अगस्त 2027 को पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा, जो अपनी अवधि और प्रभाव के कारण बेहद अनोखा होगा. इस दिन कई क्षेत्रों में दिन का उजाला अचानक फीका पड़ जाएगा, तापमान घटने लगेगा, आसमान में तारे दिखने लगेंगे और कुछ पलों के लिए ऐसा महसूस होगा जैसे पृथ्वी की गति थम गई हो.

21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण

यह घटना वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष और ब्रह्मांड के छिपे रहस्यों को और करीब से समझने का अवसर देगी. वैज्ञानिकों के अनुसार, इतना लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण पिछले सौ वर्षों में नहीं देखा गया है और इसे दोबारा देख पाना बेहद दुर्लभ होगा. 2 अगस्त 2027 को यह इस सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण होगा, जो अटलांटिक महासागर के ऊपर शुरू होगा और चंद्रमा की छाया सबसे पहले जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के पास पृथ्वी को छुएगी. इसके बाद यह अंधेरा दक्षिणी स्पेन, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों से गुजरते हुए आगे बढ़ेगा. इन क्षेत्रों में सूरज पूरी तरह से लगभग साढ़े छह मिनट के लिए छिप जाएगा. अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में ब्राजील सहित बड़े हिस्सों को यह असाधारण घटना बिल्कुल दिखाई नहीं देगी. ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और दिन का समय सांझ में बदल जाएगा. तापमान 5 से 10 डिग्री तक गिर सकता है, हवाओं की दिशा बदल सकती है और पक्षियों व जानवरों में असामान्य व्यवहार देखने को मिल सकता है, जो इस घटना को और अधिक विशेष बनाता है.

वैज्ञानिकों के लिए एक अनोखा अवसर

सभी पूर्ण सूर्यग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं, लेकिन अधिकांश ग्रहणों की अवधि 3 मिनट से कम होती है, जिससे अध्ययन का समय सीमित रहता है. 2027 का ग्रहण खास इसलिए भी है क्योंकि यह घनी आबादी और आसानी से पहुँचने योग्य क्षेत्रों से होकर गुजरेगा. 2027 में होने वाला ग्रहण खगोलविदों को लगभग दोगुना समय देगा, जिससे वे सूर्य, उसके कोरोना और पृथ्वी के वातावरण में होने वाले बदलावों का विस्तृत अवलोकन कर पाएँगे. यह ग्रहण अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक “ओपन लैब” जैसा होगा, जहाँ वैज्ञानिक सूर्य की बाहरी परतों, मैग्नेटिक फील्ड और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बारे में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ जुटा सकेंगे. यह इसे खगोल विज्ञान, तापमान के बदलाव और पशु व्यवहार जैसी वैज्ञानिक गतिविधियों के अध्ययन के लिए एक आदर्श अवसर बनाएगा. स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, इतनी अवधि वाला अगला सूर्यग्रहण 2114 तक संभव नहीं है.

लंबे ग्रहण के पीछे छिपा दुर्लभ संयोग

सूर्यग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी बिल्कुल एक सीध में आ जाते हैं. जब चंद्रमा सूर्य के बीच आकर उसकी किरणों को रोकता है, तब पृथ्वी पर अंधेरा फैलता है. हालाँकि पूर्ण सूर्यग्रहण हर 18 महीनों में कहीं-न-कहीं देखने को मिलते हैं, लेकिन इतनी लंबी अवधि का ग्रहण बेहद दुर्लभ है. लेकिन 2 अगस्त 2027 को पृथ्वी सूर्य से अपने सबसे दूर बिंदु पर होगी, जिससे सूर्य अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देगा. दूसरी ओर, चंद्रमा उसी समय अपने परिक्रमा पथ में आगे बढ़ते हुए पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर पहुँच जाएगा. इस वजह से चंद्रमा आकार में बड़ा दिखाई देगा और सूर्य को अधिक समय के लिए ढककर रख सकेगा. यही दुर्लभ खगोलीय संयोग इस ग्रहण को असाधारण रूप से लंबा बनाता है.

मिनट-दर-मिनट दिखाई देगा यह अद्भुत नजारा

पूर्णता (टोटेलिटी) आने से लगभग 60-80 मिनट पहले चंद्रमा सूर्य के किनारे को ढकना शुरू कर देगा. धीरे-धीरे सूर्य की रोशनी कम होती जाएगी और वह पतले से चांद की तरह कटा हुआ दिखाई देगा. इसके बाद अंधेरा छा जाएगा, तापमान गिरने लगेगा, तारे दिखाई देंगे और सूर्य का कोरोना एक दूधिया अंगूठी की तरह चमकेगा. वैज्ञानिक इसे लाइव वैज्ञानिक प्रयोगशाला की तरह देख रहे हैं, क्योंकि सूर्य के कोरोना को इतने साफ और इतने लंबे समय तक देखने का मौका दशकों तक फिर नहीं मिल सकता.

भारत में नहीं देख पाएंगे यह सूर्यग्रहण

यह जादुई अंधेरा 6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगा. फिर धीरे-धीरे सूर्य की रोशनी वापस लौटेगी, सामान्य परिस्थितियाँ बहाल होंगी और दुनिया भर के वेधशालाएँ (तारामंडल) हर पल को रिकॉर्ड करेंगी. यह सूर्यग्रहण केवल वैज्ञानिकों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी रोमांचक अनुभव होगा. भारत इस ग्रहण के पूर्ण पथ (path of totality) में नहीं आता है. हालांकि देश के कुछ हिस्सों में हल्का-फुल्का आंशिक सूर्यग्रहण दिख सकता है. पूर्णता की अवधि में नग्न आंखों से सूर्य देखना सुरक्षित है, लेकिन आंशिक चरणों के दौरान बिना सुरक्षा के सूर्य की ओर देखना खतरनाक है. विशेषज्ञ सोलर फिल्टर, प्रमाणित ग्रहण वाले चश्मे या अन्य स्वीकृत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने की सलाह देते हैं.

2 अगस्त 2027 को इतने लंबे समय तक दिन में अंधेरा छा जाना एक अद्भुत दृश्य होगा. सूर्य विलीन हो जाएगा, आसमान में तारे दिखाई देंगे, तापमान गिरने लगेगा और वातावरण में एक रहस्यमयी शांति छा जाएगी. यह नजारा उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जीवनभर याद रहने वाला अवसर होगा. दुनिया भर से लाखों पर्यटक इस ग्रहण को देखने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि अगली बार ऐसा दृश्य देखने के लिए एक सदी से अधिक इंतजार करना पड़ेगा.

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