लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज 54वां जन्मदिन है। इस मौके पर बीजेपी के तमाम नेताओं ने तो उन्हें शुभकामनाएं दी ही हैं, हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने भी देश भर में कई जगहों पर उनका जन्मदिन जोर-शोर से मनाया है।
योगी आदित्यनाथ ने कैसे भाजपा में मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया, उन्हें योगी आदित्यनाथ नाम कैसे मिला, इससे जुड़ी कुछ बातें जानते हैं।
पौड़ी गढ़वाल में हुआ था जन्म
योगी आदित्यनाथ का मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनका जन्म 5 जून, 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। योगी आदित्यनाथ ने कोटद्वार के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए वह ऋषिकेश आ गए। यहां वह गोरक्षपीठ के प्रमुख महंत अवैद्यनाथ से मिले और उनके शिष्य बन गए।
योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ ही चार दर्जन से ज्यादा शिक्षण, स्वास्थ्य एवं धर्मार्थ संस्थाओं के संचालक और संरक्षक भी हैं। योगी आदित्यनाथ पहली बार 12वें लोकसभा चुनाव के दौरान 1998 में गोरखपुर से सांसद बने थे। इसके बाद 13वीं, 14वीं, 15वीं और 16वीं लोकसभा में भी गोरखपुर से जीतकर लोकसभा पहुंचे। इस दौरान वह संसद में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य भी रहे। योगी आदित्यनाथ साल 2017 से उत्तर प्रदेश की विधान परिषद के सदस्य हैं।
योगी आदित्यनाथ के जीवन पर ‘The Monk Who Became Chief Minister’ बायोग्राफी लिखने वाले शांतनु गुप्ता बताते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने अपने बचपन में वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की सदस्यता ली थी लेकिन वह उसकी विचारधारा से प्रभावित नहीं हुए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हो गए।
महंत अवैद्यनाथ से मिले योगी
शांतनु गुप्ता अपनी किताब में लिखते हैं कि योगी आदित्यनाथ राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान गोरखपुर मठ में महंत अवैद्यनाथ से मिले। महंत अवैद्यनाथ योगी आदित्यनाथ से बहुत प्रभावित हुए और उस दौरान धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोग योगी आदित्यनाथ को ‘छोटे महंत’ के नाम से जानने लगे थे।
1994 में बनाया गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी
योगी आदित्यनाथ को उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ ने साल 1994 में गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी बनाया था। उत्तराधिकारी बनने के बाद उनका नाम योगी आदित्यनाथ रखा गया। वह नाथ संप्रदाय के प्रमुख और गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर हैं। उत्तराधिकारी के रूप में योगी आदित्यनाथ ने कई स्कूलों और कॉलेज के साथ ही अस्पताल का भी संचालन किया। संन्यासी के रूप में योगी आदित्यनाथ ने हिंदू धर्म ग्रंथों का अध्ययन किया।
1996 में उनका राजनीति से जुड़ाव तब शुरू हुआ जब उन्हें महंत अवैद्यनाथ के चुनाव अभियान का प्रभारी बनाया गया। जब महंत अवैद्यनाथ 1998 में सक्रिय राजनीति से विदा हुए तो उन्होंने योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित किया।
योगी आदित्यनाथ जातियों और क्षेत्रों में बंटे हिंदू समुदाय को एकजुट करने का आह्वान करते रहे हैं। 2002 में योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी की स्थापना की। इस संगठन में शामिल स्वयंसेवकों ने गो रक्षा, लव जिहाद की घटनाओं के खिलाफ कार्रवाई की। 2005 में योगी आदित्यनाथ ने ‘घर वापसी’ नाम से शुद्धिकरण अभियान चलाया और इसके तहत हिंदू धर्म छोड़कर गए लोगों की उनके मूल धर्म में वापसी कराई गई। इस वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर रहे, उन्हें जेल जाना पड़ा।
2017 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी में बड़े हिंदू चेहरे के रूप में सामने आए हैं। असम से लेकर तमिलनाडु और तमाम प्रदेशों में बीजेपी योगी आदित्यनाथ को स्टार प्रचारक के तौर पर उतारती रही है।
समर्थकों के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ न सिर्फ हिंदुत्व बल्कि सुशासन के भी प्रतीक हैं और उनके राज में उत्तर प्रदेश में आम आदमी के भीतर इस बात का भरोसा बढ़ा है कि कोई भी अपराधी या माफिया उन्हें परेशान नहीं कर सकता। बीजेपी कार्यकर्ताओं का यह भी दावा है कि माफिया और गुंडों को उत्तर प्रदेश छोड़कर भागना पड़ा है। उनके शासन के दौरान उत्तर प्रदेश ने गुंडा और माफिया राज को पीछे छोड़कर विकसित उत्तर प्रदेश के रूप में अलग पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ लगातार कहते रहे हैं कि अपराध, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद के खिलाफ उनकी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है और उत्तर प्रदेश में महिलाओं, व्यापारियों से लेकर आम लोगों की सुरक्षा तक में सेंध लगाने वाले किसी भी शख्स से कानून पूरी सख्ती से निपटेगा।
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री रहते हुए ही साल 2025 में उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा महाकुंभ लगा। महाकुंभ के दौरान 65 करोड़ से ज्यादा लोगों ने स्नान किया। इस दौरान किए गए इंतजामों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कामकाज की तारीफ हुई। कोरोना की महामारी के दौरान ही 25 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन, स्वास्थ्य सेवाएं, लाखों लोगों को क्वॉरेंटाइन करने का काम भी योगी आदित्यनाथ की सरकार में बखूबी हुआ है। उनके समर्थक उन्हें हिंदू हृदय सम्राट कहकर पुकारते हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक तौर पर ‘यूपी प्लस योगी बहुत हैं उपयोगी’ का नारा देकर योगी आदित्यनाथ के कामकाज पर मुहर लगाई थी। प्रधानमंत्री ने योगी आदित्यनाथ के विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों के लिए उठाए गए कदमों की कई बार तारीफ की है।
योगी आदित्यनाथ के समर्थकों का कहना है कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही उनकी सरकार ने कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, निवेश धार्मिक पर्यटन से लेकर तमाम विषयों पर काफी काम किया है। समर्थकों के मुताबिक, उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे बने और बड़े पैमाने पर निवेश भी हुआ।
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री रहते हुए ही भाजपा और एनडीए ने 2022 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। अब जब 9 महीने के अंदर उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं तो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को उम्मीद है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सूबे में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरएसएस की पत्रिका पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि यूपी में पहली बार सड़कों पर ईद की नमाज नहीं हुई और मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज भी कम हो गई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।




