नई दिल्ली, राजनीति सौ मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी मैराथन है, जिसमें धैर्य और निरंतरता सबसे अहम होती है। मेरा लक्ष्य है बंगाल से लेकर केरल तक और संसद से लेकर पंचायत चुनाव तक भगवा लहराए….’
बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नीतिन नबीन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पटना स्थित कार्यालय में यह बात कहते हुए अपना रोडमैप देश को दिखा दिया।
26 साल की उम्र में विधायक और 45 की उम्र में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष। नितिन नबीन का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प है। सोमवार (19 जनवरी) को वो निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुने गए। नितिन नबीन की ताजपोशी को बीजेपी में एक बड़े पीढ़ीगत बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
बता दें कि नितिन नबीन की उम्र महज 45 साल है। अगर हम देश भर में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की लिस्ट देखें, तो एक भी मुख्यमंत्री ऐसा नहीं है जो उम्र में उनसे छोटा हो। बीजेपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू हैं, जिनकी उम्र 46 वर्ष है। नितिन उनसे भी एक साल छोटे हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त हो गया था। सियासी परिवार से ताल्लुक रखने वाले नितिन नबीन को 14 दिसंबर को बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। उसी दिन से यह कयास खत्म हो गए कि पार्टी के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा के बाद कमान किसके हाथ में जाएगी। राजनीतिक गलियारों में उनका नाम अपेक्षाकृत चौंकाने वाला माना गया, खासकर इसलिए भी क्योंकि इस नियुक्ति को लेकर बीजेपी और उसके वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच खींचतान की चर्चाएं चल रही थीं।
रांची में जन्म, दिल्ली में पढ़ाई
नितिन नबीन के पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा बीजेपी के बड़े नेता थे। वे पटना वेस्ट विधानसभा सीट से चार बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए। 23 मई 1980 को रांची में जन्मे नितिन नबीन ने साल 1996 में पटना के एक सीबीएससी (CBSE) स्कूल से दसवीं की पढ़ाई की। इसके बाद वे पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए। उन्होंने दिल्ली के एक स्कूल से 1998 में 12वीं पास की। नितिन नबीन की पत्नी का नाम दीपमाला श्रीवास्तव है। इनके दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी।
बांकीपुर विधानसभा सीट से पांच बार के विधायक
कम बोलने और जमीन से जुड़े नेता के रूप में पहचाने जाने वाले नितिन नबीन की राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो वो पांच बार विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं। वह फिलहाल बांकीपुर के विधायक हैं। उन्होंने साल 2006 में पहली बार साल 2006 में पटना वेस्ट विधानसभा सीट से उपचुनाव में जीत दर्ज की। परिसीमन के बाद वह बांकीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं और साल 2010, 2015, 2020 और 2025 में विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।
जिम्मदेरियों से है पुरानी दोस्ती
नीतीश कुमार सरकार में वो कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन के स्तर पर भी उनका सफर उतना ही सक्रिय रहा है। वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
इसके अलावा, पार्टी ने उन्हें सिक्किम का प्रभारी और छत्तीसगढ़ का सह-प्रभारी बनाकर चुनावी रणनीति और संगठनात्मक प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। दिसंबर 2025 में बीजेपी संसदीय बोर्ड ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया। इस पद पर आते ही नितिन नबीन ने पूरी सक्रियता के साथ काम संभाल लिया।
चुनौतियां भी कम नहीं…
दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का सबसे बड़ा नेता बनना मानों एक कांटों भरा ताज पहनना है। भारतीय जनता पार्टी के गठन के 45 साल के सियासी इतिहास में बीजेपी में 11 राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। 45 वर्षीय नीतिन, पार्टी के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, ऐसे समय में जब पार्टी के सामने पांच राज्यों में चुनाव जीतने की सबसे बड़ी चुनौती है।
नबीन ऐसे समय अध्यक्ष बन रहे हैं जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इनमें से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं, जहां बीजेपी आज तक सरकार नहीं बना पाई है। वहीं बीजेपी के सामने असम में तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार सरकार बनाने की चुनौती है।
दक्षिण भारत की ‘अग्निपरीक्षा’
वहीं, दक्षिण में कमल का उदय कराना नितिन नबीन की सबसे बड़ी चुनौती होगी। तमिलनाडु और केरल में बीजेपी का सरकार बनाना आज भी पार्टी के लिए एक सपना है। बात करें तमिलनाडु की तो बीजेपी ने स्टालिन सरकार को सत्ता से हटाने के लिए एआईडीएमके के साथ हाथ मिलाया है। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने तमिलनाडु में 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन किसी सीट पर उसे जीत नहीं मिली थी।
वहीं, बात करें केरल की, तो यह एक मात्र राज्य है, जहां लेफ्ट की सरकार है. हालांकि, स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी को मुस्कुराने का मौका मिला। लगभग 600 स्थानीय निकायों में बीजेपी के पार्षदों की जीत हुई. वहीं, तिरुवनंतपुरम में बीजेपी नेता वीवी राजेश ने मेयर पद की जिम्मेदारी भी संभाल ली है।
नितिन नबीन अब बीजेपी अध्यक्षों की उस श्रृंखला में शामिल हो गए हैं, जिसकी शुरुआत 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी से हुई थी। इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह, और जेपी नड्डा जैसे दिग्गजों ने पार्टी की कमान संभाली। अब इस लिस्ट में सबसे युवा नाम के रूप में नितिन नबीन दर्ज हो गया है।
- अटल बिहारी वाजपेई (1980-1986)
- लाल कृष्ण आडवाणी (1986-1990, 1993-1998, 2004-2005)
- मुरली मनोहर जोशी (1991 – 1993)
- कुशाभाऊ ठाकरे (1998-2000)
- बंगारू लक्ष्मण (2000-2001)
- के. जना कृष्णमूर्ति (2001-2002)
- एम. वेंकैया नायडू (2002-2004)
- नितिन गडकरी (2010-2013)
- राजनाथ सिंह (2005-2009, 2013-2014)
- अमित शाह (2014-2017, 2017-2020)
- जगत प्रकाश नड्डा (2020-2026)
भले ही नितीन नबीन के आगे चुनौतियां कई हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि सोशल मीडिया से लेकर पोलिंग बूथ तक, बीजेपी कार्यकर्ताओं की मेहनत ने कई असंभव से लगने वाले काम को संभव कर दिखाया है।
पिछले 45 सालों में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने अपनी पूरी जिंदगी पार्टी के लिए झोंक दी। अब, नितिन नबीन को पार्टी ने यह जिम्मेदारी देकर साबित कर दिया है कि बीजेपी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नई लीडरशिप तैयार कर रही है।




