एक अप्रैल से बहुत कुछ हो जायेगा महँगा, चीज़ों की लिस्ट देख कर आपके उड़ जायेंगे होश

नई दिल्ली, वैश्विक राजनीति में गहराते ईरान संकट ने भारतीय बाजार और आम आदमी की रसोई से लेकर लग्जरी तक की योजनाओं को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) में आई बाधाओं के कारण आगामी 1 अप्रैल से कार, फ्रिज, एसी और टीवी जैसे उत्पादों की कीमतों में 5-6% तक की भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है।

कंपनियां बढ़ती इनपुट लागत का बोझ अब सीधे ग्राहकों पर डालने की तैयारी कर चुकी हैं।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? कच्चे तेल का खेल

ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसका सीधा असर प्लास्टिक, रेजिन और पॉलिमर जैसे उन उत्पादों पर पड़ा है जो कच्चे तेल से बनते हैं। पिछले एक महीने में इन कच्चे मालों की कीमतों में 20-25% का उछाल आया है। इसके अलावा, माल ढुलाई (Freight Rates) में 10% की वृद्धि और डॉलर के मुकाबले रुपए के 2% कमजोर होने से आयातित सामान और भी महंगा हो गया है।

ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार

1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू होते ही कंपनियां नई कीमतें लागू कर सकती हैं:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स (AC, फ्रिज, टीवी): इन उत्पादों में प्लास्टिक के पुर्जों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, इसलिए इनकी कीमतें 5-6% तक बढ़ सकती हैं।
  • ऑटोमोबाइल (कार और टू-व्हीलर): कंपनियां कीमतों में 2-3% की बढ़ोतरी पर विचार कर रही हैं। लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज और ऑडी ने तो 2% बढ़ोतरी का आधिकारिक ऐलान भी कर दिया है।
  • अन्य उत्पाद: जूते, सिंथेटिक कपड़े और घरेलू पेंट की कीमतों में 9-10% तक की सबसे बड़ी तेजी देखी जा सकती है।

जीएसटी कटौती का लाभ होगा खत्म!

गोदरेज एंटरप्राइजेज और हायर इंडिया जैसे बड़े ब्रांड्स के अधिकारियों का मानना है कि लागत में आई इस तेजी ने कंपनियों के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। जानकारों के मुताबिक, कच्चे माल की सप्लाइ में अनिश्चितता के कारण जीएसटी (GST) दरों में किसी भी संभावित कटौती का लाभ अब कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खत्म हो जाएगा। सप्लायर अब लंबी अवधि के अनुबंध करने से डर रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है।

कंपनियों की रणनीति: ‘फोर्स मेज्योर’ का सहारा

आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कंपनियां अब केवल 7 से 15 दिनों की छोटी अवधि की योजना पर काम कर रही हैं। कुछ कंपनियां ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) प्रावधान का इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि वे पुराने अनुबंधों की शर्तों से हटकर कच्चे माल की नई और बढ़ी हुई कीमतें तय कर सकें। बिस्कुट, साबुन और शैम्पू जैसे दैनिक उपयोग (FMCG) के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं।


प्रमुख लागत वृद्धि एक नजर में:

कच्चा माल / सेवा कीमतों में बढ़ोतरी
प्लास्टिक, रेजिन, पॉलिमर 20-25%
पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर 20-25%
माल ढुलाई दरें (Freight) 7-10%
रुपए की कमजोरी (बनाम डॉलर) 2%

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