लखनऊ, शुक्रवार नाज़िम अली इमामबाड़े से यौमे आशूरा का जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों की तादाद में अज़ादार शामिल हुए। इस दौरान “या हुसैन”, “या सकीना”, “या अब्बास” और “या मौला अली” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
जुलूस आलिम-ए-दीन मौलाना कल्बे जवाद मौजद रहे। मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि हर वर्ष जिला प्रशासन मोहर्रम में सड़को पर पानी डलवाकर सफाई करवाता था। इससे गर्मी से भी राहत मिलती थी।लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। गर्मी से लोगों के पैरों में छाले पड़ गए।
मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि जब हज़रत इमाम हुसैन से पूछा गया कि वह किस मुल्क में जाना पसंद करेंगे, तो उन्होंने किसी मुस्लिम देश का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान का नाम लिया था। उन्होंने कहा कि “हिंदुस्तान से हमें अपनी वतन की खुशबू आती है।” उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में हज़रत इमाम हुसैन से मोहब्बत करने वालों की बड़ी तादात है। झांसी की रानी के नाम का ताज़िया, महाराजा बनारस के नाम का ताज़िया और कई हिंदू राजाओं के नाम से आज भी ताज़िए रखे जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने ‘इमाम हुसैन’ शीर्षक से कर्बला पर पुस्तक लिखी, जो गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे की मिसाल है। लखनऊ की अवाम भी सड़कों पर उतरकर “या हुसैन”, “या अली” के नारे लगाते हुए कर्बला तक जाएंगे, जहां ताज़िए दफन किए जाएंगे। जुलूस के दौरान कुछ बच्चों के हाथों में ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद अली खामेनेई की तस्वीरें भी दिखाई दीं। प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद इस बार सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं कराया गया, जबकि, हर साल ऐसा किया जाता था।
उन्होंने कहा कि सड़कें इतनी गर्म हैं कि लोगों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं। इसे उन्होंने प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया। मौलाना ने कहा कि जिस तरीके से ताजिए को इंची टेप से नापा जा रहा है, इस तरीके से कावड़ यात्रा में भी इंची टेप लेकर, क्या यह पुलिस अधिकारी सड़क पर उतरेंगे। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि दुनिया भर में लोग अपने बच्चों का नाम हुसैन रखते हैं, कोई अपने बच्चे का नाम यज़ीद नहीं रखा।
50 किलोग्राम मेवों से तैयार इस अलम में मखाना, खजूर, छुहारा, बादाम, अंजीर और नारियल का इस्तेमाल किया गया है, जिसे कर्बला तालकटोरा ले जाया गया है। इसके अलावा चांदी के अलम भी जुलूस में शामिल है। गुलाब के फूलों से सजे जुलूस में बड़ी संख्या में युवा नौहा पढ़ते और मातम करते हुए कर्बला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। अकबरी गेट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।




