काठमांडू, नेपाल के हालिया चुनावी रुझान बता रहे हैं कि राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारी बहुमत की ओर बढ़ रही है। प्रत्यक्ष और समानुपातिक (PR) मतों को जोड़कर यह पार्टी ‘दो-तिहाई’ के जादुई आंकड़े (184 सीट) के बेहद करीब है।
जहां RSP को बड़ी जीत मिली है, वहीं नेपाली कांग्रेस और एमाले पिछड़ते दिख रहे हैं।
हालांकि, इस भारी जीत के बावजूद संविधान बदलना RSP के लिए इतना आसान नहीं होगा। सत्ता की इस दौड़ ने देश की राजनीतिक दिशा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है, लेकिन संवैधानिक बाधाएं अभी भी बरकरार हैं।
Nepal Election Results 2026: दो-तिहाई बहुमत का गणित
प्रतिनिधि सभा की कुल 275 सीटों में से संविधान संशोधन के लिए 184 सीटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, RSP ने प्रत्यक्ष चुनाव में 125 सीटें जीती हैं और समानुपातिक प्रणाली में भी उसे करीब 58 सीटें मिलने की उम्मीद है। इस तरह पार्टी 183 के आंकड़े तक पहुंचती दिख रही है, जो दो तिहाई बहुमत से मात्र एक कदम दूर है। यह जीत पार्टी के लिए ऐतिहासिक तो है, लेकिन अकेले दम पर बड़े फैसले लेने के लिए उसे अन्य छोटे दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
Proportional Representation Vote Tally: संविधान संशोधन की असल चुनौती
भले ही RSP निचले सदन में भारी बहुमत हासिल कर ले, लेकिन संविधान बदलने के लिए संसद के दोनों सदनों, प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रीय सभा में दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है। राष्ट्रीय सभा का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि इसमें प्रांतीय और स्थानीय प्रतिनिधि वोट डालते हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय सभा में RSP की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है। इसलिए, जब तक दोनों सदनों में समर्थन नहीं मिलता, पार्टी अपने चुनावी वादों के अनुसार संघीय ढांचे या चुनाव प्रणाली में बड़े बदलाव नहीं कर पाएगी।
RSP Election Victory: समानुपातिक मतों का ताजा रुझान
निर्वाचन आयोग के अनुसार, समानुपातिक (PR) श्रेणी में अब तक एक करोड़ से अधिक वोटों की गिनती हो चुकी है। इसमें RSP 50 लाख से ज्यादा वोटों के साथ सबसे आगे बनी हुई है। दूसरे नंबर पर नेपाली कांग्रेस और तीसरे पर CPN-UML (एमाले) है। अन्य दल जैसे श्रमिक संस्कृति पार्टी और जनमत पार्टी भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह रुझान स्पष्ट करता है कि नेपाली जनता ने इस बार पारंपरिक दलों के बजाय एक नए विकल्प और बदलाव के पक्ष में अपना मत दिया है।
भविष्य की राजनीतिक राह
RSP ने देश की संघीय संरचना और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया को बदलने का वादा किया है। इस भारी जनादेश के बाद जनता की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं। लेकिन व्यावहारिक रूप से, संविधान में किसी भी बड़े फेरबदल के लिए पार्टी को राजनीतिक सहमति बनानी होगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि RSP अपने एजेंडे को लागू करने के लिए अन्य दलों के साथ कैसे तालमेल बिठाती है और क्या वह राष्ट्रीय सभा की बाधा को पार करने में सफल हो पाती है।




