अमिताभ दास को पड़ गया महँगा! IPS को पुलिस ने क्यों किया गिरफ्तार? क्या है लेटर पैड वाला कनेक्शन

पटना, पटना पुलिस (Patna Police) ने 1994 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास (Ex-IPS Amitabh Das) को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें पटना स्काइज अपार्टमेंट (Patna Skies Apartment) से गिरफ्तार किया गया है।

नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में मुख्यमंत्री के परिवार पर विवादित टिप्पणी और भ्रामक खबरें फैलाने के आरोप में उन पर चित्रगुप्त नगर थाने (Chitragupta Nagar Police Station) में एफआईआर (FIR) दर्ज थी।

अमिताभ दास की गिरफ्तारी सिर्फ ताजा बयानों तक सीमित नहीं है। उन पर रिटायरमेंट (Retirement) के बाद भी सरकारी रसूख का गलत इस्तेमाल करने और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसे संगीन आरोप भी लगे हैं। अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) के बाद खुद की ‘क्रांतिकारी’ छवि बनाने वाले दास का विवादों से पुराना नाता रहा है। आइए जानतें हैं पूर्व आईपीएस अमिताभ दास की गिरफ्तारी से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारी…

क्या है ‘लेटर पैड’ वाला कानूनी विवाद?

अमिताभ दास की गिरफ्तारी के पीछे एक बड़ा कानूनी कारण उनका लेटर पैड (Letter Pad) है। उन पर आरोप है कि साल 2018 में जबरन रिटायर (Forced Retirement) किए जाने के बावजूद, वे अपने निजी पत्राचार में भारत सरकार के राजकीय प्रतीक चिन्ह (National Emblem) और IPS पदनाम का अवैध रूप से इस्तेमाल कर रहे थे।

कानून क्या कहता है?

‘भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम 2005’ के तहत कोई भी सेवामुक्त अधिकारी सरकारी प्रतीकों का उपयोग नहीं कर सकता। यह एक दंडनीय अपराध है और इसी ‘रसूख’ दिखाने की चाहत ने उन्हें कानूनी शिकंजे में फंसा दिया।

क्या है NEET छात्रा का मामला?

हाल ही में पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल (Shambhu Girls Hostel) में एक नीट छात्रा की मौत हुई। अमिताभ दास ने इस मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम घसीटते हुए उनके DNA टेस्ट की मांग कर दी थी। पुलिस का कहना है कि बिना किसी सबूत के ऐसे गंभीर आरोप लगाना समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश है, जिसके चलते उन पर यह कार्रवाई हुई।

छेड़छाड़ और यौन शोषण का क्या है मामला?

अमिताभ दास का करियर केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण के आरोपों से भी घिरा रहा है:

  • 2006 का मामला: जमुई में तैनाती के दौरान एक महिला ने उन पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण का आरोप लगाया था।
  • देवघर केस: देवघर में एसपी रहते हुए एक विदेशी महिला से छेड़छाड़ (Molestation) का मामला काफी सुर्खियों में रहा था।
  • ताजा अपडेट: अब उन पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत भी केस दर्ज होने की जानकारी सामने आ रही है, जो उनकी मुश्किलों को कई गुना बढ़ा सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

1994 बैच के तेज-तर्रार IPS से जबरन रिटायरमेंट तक का सफर

1994 बैच के अमिताभ दास कभी अपनी कड़क ईमानदारी के लिए चर्चित थे, लेकिन जल्द ही उनके तेवर विभाग के लिए सिरदर्द बन गए।

  • उन्होंने अपनी ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) लिखवाने से मना कर दिया था, जो पुलिस विभाग में दुर्लभ है।
  • उन्होंने एक केंद्रीय मंत्री पर नक्सलियों से साठगांठ का आरोप लगाकर दिल्ली तक हलचल मचा दी थी।
  • लगातार अनुशासनहीनता के कारण 2018 में केंद्र और राज्य सरकार ने उन्हें ‘अयोग्य’ करार देते हुए नौकरी से हटा दिया था।

रिटायरमेंट के बाद ‘क्रांतिकारी’ नेता की छवि

वर्दी उतरने के बाद उन्होंने ‘क्रांतिकारी न्याय पार्टी’ बनाई और सोशल मीडिया (Facebook/YouTube) के जरिए बिहार सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर हमलावर रहे। अक्सर विवादित पत्र लिखकर सनसनी फैलाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन गया, जिसे उनके समर्थक ‘साहस’ और आलोचक ‘सस्ते प्रचार का जरिया’ मानते हैं।

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