नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश के संभल में CO के बयान ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। शांति समिति की बैठक के दौरान संभल के सीओ (CO) कुलदीप कुमार ने कुछ ऐसी बातें कहीं, जिस पर अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने तीखा पलटवार किया है।
सीओ के बयान का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति गरमा गई है और खाकी की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या था संभल सीओ का विवादित बयान?
शांति समिति की बैठक में सीओ कुलदीप कुमार ने ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के संदर्भ में कहा, “कुछ लोग ईरान के लिए छाती पीट रहे हैं कि ईरान को मार डाला। अगर इतना ही कुछ है तो चले जाओ ईरान। लेकिन अगर उस झगड़े का हमारे देश की कानून व्यवस्था पर असर होगा, तो हम बढ़िया वाला इलाज करेंगे।” इस बयान के सामने आने के बाद AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे सीधे तौर पर एक समुदाय विशेष को धमकाने वाला कृत्य करार दिया।
शादाब चौहान का पलटवार: ‘पुलिस का काम डराना नहीं’
एआईएमआईएम नेता शादाब चौहान ने वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सीओ का काम कानून का पालन करवाना है, न कि लोगों को डराना। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “सीओ साहब ने ट्रैवल एजेंसी कब से खोल ली? वे यह कैसे तय कर सकते हैं कि किसे किस बात पर गम मनाना है और किसे कहां जाना है?” चौहान ने सवाल उठाया कि क्या किसी अंतरराष्ट्रीय नेता की मृत्यु पर दुख जताना भारतीय संविधान में कहीं भी प्रतिबंधित है या भारत सरकार ने इसके खिलाफ कोई गाइडलाइन जारी की है?
विदेश मंत्री का दिया हवाला
अपनी बात को मजबूती से रखते हुए शादाब चौहान ने देश के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “खुद विदेश मंत्री जयशंकर जी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के बाद उनके प्रतिनिधि से मिले थे। मैं खुद भी पार्टी की ओर से शोक व्यक्त करने गया था, तो क्या हम सब देशद्रोही हो गए?” उन्होंने सवाल किया कि किसी देश के सर्वोच्च नेता की मौत पर संवेदना व्यक्त करना किस धारा के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
खाकी का काम और अंबेडकर की सीख
चौहान ने बाबा साहब अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कानून लागू करने वाले लोग सही नहीं होंगे, तो अच्छे से अच्छा कानून भी बुरा साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाकी का काम अपराध पर नियंत्रण करना और वैधानिक कार्रवाई करना है, न कि अपने व्यक्तिगत विचार थोपना। उन्होंने कहा कि हम संविधान पर विश्वास रखते हैं और अगर कोई कानून हाथ में लेता है तो पुलिस उस पर मुकदमा दर्ज करे, लेकिन मर्यादित भाषा का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




