अयोध्या, रामनगरी अयोध्या में बने भव्य Ram Mandir Ayodhya को लेकर देशभर में एक बड़ा वित्तीय विवाद खड़ा हो गया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र इस मंदिर में वर्षों से चढ़ रहे करोड़ों रुपये के नकद दान और सोने-चांदी के कीमती आभूषणों में कथित हेराफेरी के आरोपों ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। अब इस मामले में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने विवाद को और गंभीर बना दिया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि मंदिर का संचालन करने वाले Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust को करीब 6 साल पहले ही वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई थी, लेकिन उस चेतावनी को नजरअाज कर दिया गया। अब वही लापरवाही देश के सबसे बड़े धार्मिक वित्तीय विवादों में बदलती दिखाई दे रही है।
2020 में ही ऑडिट फर्म ने दिया था रेड अलर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर 2020 में ट्रस्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी के विशेष अनुरोध पर एक निजी ऑडिट फर्म ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन, इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट की विस्तृत समीक्षा की थी।
इस रिपोर्ट में बेहद गंभीर कमियां उजागर हुई थीं। ऑडिट फर्म ने साफ लिखा था कि मंदिर में आने वाले दान का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। डेटा मैनेजमेंट बेहद गैर-पेशेवर तरीके से हो रहा है और भविष्य में इससे वित्तीय गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि किसी भी वित्तीय एंट्री या लेनदेन पर सेकंड या थर्ड लेवल वेरिफिकेशन सिस्टम मौजूद नहीं था, जिससे जवाबदेही तय करना लगभग असंभव था।
3,500 करोड़ रुपये दान… लेकिन रिकॉर्ड सिस्टम कमजोर
Government of Uttar Pradesh द्वारा गठित जांच टीम के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 फरवरी 2020 को बने इस ट्रस्ट को अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये से अधिक नकद दान मिल चुका है।
इसके अलावा करोड़ों रुपये कीमत के सोने, चांदी और हीरे-जवाहरात भी मंदिर में चढ़ाए गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन बहुमूल्य वस्तुओं का व्यवस्थित रिकॉर्ड ही नहीं रखा गया।
सोने-चांदी के रिकॉर्ड गायब, बड़ा सवाल
ऑडिट रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया था कि भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले आभूषणों और कीमती धातुओं के लिए मजबूत Stock Register System बनाया जाना चाहिए।
लेकिन जांच में सामने आया कि ट्रस्ट की बैठकों में सिर्फ नकद दान का रिकॉर्ड पेश किया जाता था, जबकि सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का डेटा या तो अधूरा था या कई मामलों में पूरी तरह गायब मिला।
यहीं से पूरे विवाद ने बड़ा रूप लेना शुरू किया।
SIT ने शुरुआती जांच में पकड़े 4 बड़े झोल
13 जून को यूपी सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया था। टीम की अगुवाई लखनऊ कमिश्नर Vijay Vishwas Pant कर रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में 4 बेहद गंभीर अनियमितताएं सामने आईं —
1. कैश कलेक्शन में पारदर्शिता नहीं
दान पेटियों से नकदी निकालने, उसे सुरक्षित स्थान तक ले जाने और गिनती करने की पूरी प्रक्रिया में भारी लापरवाही पाई गई।
2. कीमती आभूषणों का रिकॉर्ड गायब
सोने-चांदी, हीरे-जवाहरात और अन्य बहुमूल्य दान का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब मौजूद नहीं मिला।
3. टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी
सुरक्षा कर्मचारियों की नियुक्ति और अन्य खरीद प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
4. भाई-भतीजावाद के आरोप
जांच में सामने आया कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने नियमों को दरकिनार कर अपने रिश्तेदारों को मंदिर प्रशासन में मोटी तनख्वाह वाली नौकरियां दिलवाईं।
45 दिन CCTV बैकअप बना जांच में सबसे बड़ी बाधा
जांच टीम के सामने सबसे बड़ी तकनीकी समस्या मंदिर परिसर के CCTV सिस्टम को लेकर आई।
मंदिर परिसर का CCTV फुटेज केवल 45 दिनों तक ही सर्वर में सुरक्षित रहता है। ऐसे में पुराने डिजिटल सबूत मिट चुके हैं और जांच एजेंसियों को अब गवाहों और कर्मचारियों के बयानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
SIT ने सरकार को सुझाव दिया है कि CCTV बैकअप को तुरंत बढ़ाकर 180 दिन किया जाए और दान की Daily Recording और Weekly Audit अनिवार्य किया जाए।
अब FIR की तैयारी, CBI जांच की मांग भी उठी
कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने के बाद कहा है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है।
अगले 10 से 15 दिनों में विस्तृत जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दी जाएगी, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की जाएगी।
इधर मामला अब Supreme Court of India तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर पूरे मामले की जांच Central Bureau of Investigation से कराने की मांग की गई है।
आस्था पर सवाल या सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता?
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में अगर श्रद्धालुओं के चढ़ावे में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो यह सिर्फ वित्तीय घोटाला नहीं बल्कि जनता के विश्वास पर सीधा आघात माना जाएगा।
अब पूरा देश अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है कि आखिर करोड़ों की इस कथित हेराफेरी के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।




