लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सूबे को आखिरकार पिछले चार साल के लंबे इंतजार के बाद अपना नया स्थायी और पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है।
राज्य सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ और बेहद भरोसेमंद आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश पुलिस का नया मुखिया नियुक्त किया है। रविवार शाम को अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद की ओर से इस आशय का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया।
चार साल बाद खत्म हुआ कार्यवाहक का दौर
उत्तर प्रदेश में 11 मई 2022 को तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से लगातार कार्यवाहक डीजीपी ही बनाए जा रहे थे, जिसे लेकर विपक्षी दल भी योगी सरकार को लगातार घेर रहे थे। इस कशमकश को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 26 मई को हुई बैठक में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों-1990 बैच की रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण का पैनल राज्य सरकार को भेजा था। शासन स्तर पर गहन मंथन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगा दी।
इटावा में डाकुओं का सफाया और बेदाग करियर
मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण की गिनती उत्तर प्रदेश कैडर के सबसे ईमानदार, कड़क और रणनीतिक सोच वाले पुलिस अफसरों में होती है। वह एक जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे। इससे पहले वह डीजी इंटेलिजेंस और पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन जैसे दो महत्वपूर्ण पदों को एक साथ संभाल रहे थे। अपने करीब 35 साल के करियर में वह लखनऊ, नोएडा, आगरा, मथुरा और इटावा समेत कई संवेदनशील जिलों के कप्तान (SP/SSP) रह चुके हैं। इटावा में तैनाती के दौरान उन्होंने दस्यु गिरोहों (डाकुओं) का सफाया कर अपनी धाक जमाई थी। इसके अलावा वह आगरा जोन के एडीजी, सीबीसीआईडी और विजिलेंस जैसे बड़े विभागों में भी प्रमुख भूमिकाएं निभा चुके हैं।
2028 तक संभालेंगे कमान, सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूपीएससी की व्यवस्था के अनुसार स्थायी डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का होता है, ऐसे में राजीव कृष्ण साल 2028 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। पदभार संभालते ही उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करना सबसे प्रमुख है। इसके साथ ही प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाना, पुलिस को डिजिटल युग के अनुसार अपग्रेड करना, थाना स्तर पर आम जनता की सुनवाई को सुलभ व पारदर्शी बनाना और आगामी राजनीतिक हलचलों व त्योहारों के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, नए डीजीपी को साफ निर्देश दिए गए हैं कि अपराधियों में खौफ और आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा करना ही उनकी पहली प्राथमिकता होगी।




