कैनविज समूह पर ED का शिकंजा, दोगुना पैसे का लालच देकर की करोड़ों की ठगी का केस दर्ज

नई दिल्ली, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन दोगुना करने का लालच देकर निवेशकों से करोड़ों की ठगी के आरोप में बरेली के कैनविज समूह के विरुद्ध धनशोधन निवारण अधिनियम (मनी लांड्रिंग) के तहत केस दर्ज किया है।

ईडी को अंदेशा है कि चिट फंड कंपनी की आड़ में कालेधन को सफेद किया गया। समूह से जुड़े लोगों से भी पूछताछ होगी। उनके बैंक खातों से लेनदेन, कॉल डिटेल तथा अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

 

समूह ने वर्ष 2007 में कैनविज नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी बनाकर निवेशकों से पैसे जमा कराए गए। लोगों को तीन से चार वर्ष में धन दोगुना करने का झांसा दिया गया। भरोसा दिया गया कि मूलधन पर प्रतिमाह ब्याज भी मिलेगा। बड़ी संख्या में लोगों ने रुपये जमा किए। बाद में रियल एस्टेट में पैसा लगाने की योजना बनाई। इसके तहत किसी को धन दोगुना करने तो किसी को कैनविज कॉलोनियों में प्लॉट का झांसा दिया गया। भरोसा जीतने के लिए कुछ निवेशकों को जमा धन का कुछ हिस्सा लाभांश के तौर पर दिया गया।

पिछले वर्ष कंपनी बंद कर दी तब निवेशकों को ठगी का पता चला। इस बीच समूह के कर्ताधर्ता संपत्तियां बेचकर फरार हो गए। लोगों की जमापूंजी डूबी तो बरेली और आसपास के जिलों समेत, बिहार, झारखंड में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए। इस बीच बड़े पैमाने पर निवेशकों का पैसा डूबने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय धनशोधन निवारण अधिनियम (मनी लांड्रिंग) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कंपनी के कर्ताधर्ता कन्हैया गुलाटी तथा उसके जुड़े लोगों के भूमिका की जांच शुरू हो गई है। ईडी सूत्रों के मुताबिक कैनविज समूह के खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

नोएडा के भसीन इंफोटेक के संचालक से ईडी की लंबी पूछताछ

ग्रेटर नोएडा के ‘द ग्रैंड वेनिस मॉल’ मालिक तथा भसीन इंफोटेक कंपनी के संचालक सतिंदर सिंह भसीन की मुश्किलें बढ़ रहीं है। प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित जोनल कार्यालय में भसीन से लंबी पूछताछ की। शुक्रवार को देर रात तक पूछताछ जारी रही। ईडी के सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में आए तथ्यों के आधार पर शनिवार को बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। कारोबारी सतिंदर सिंह भसीन पर प्रवर्तन निदेशालय ने शिकंजा कसना शुरू किया है। ईडी ने नोएडा पुलिस में भसीन के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर के आधार पर मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि भसीन इंफोटेक, ग्रैंड वेनिस समूह की संस्थाएं, सतिंदर सिंह भसीन, क्विंसी भसीन और अन्य आरोपियों ने वाणिज्यिक इकाइयों की समय पर डिलीवरी का वादा करके रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेशकों से सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाए थे। बाद में निवेशकों की रकम वापस नहीं की। उनकी रकम को समूह की कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं में डायवर्ट किया गया, जिनको सतिंदर सिंह भसीन, हरप्रीत सिंह छाबड़ा, अजय धवन नियंत्रित करते थे।

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