लखनऊ , उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों, माफियाओं और रसूखदारों के दम पर असलहे लहराने और वीआईपी सुरक्षा लेकर घूमने वालों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख और सख्त रुख अख्तियार किया है।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के गृह विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व सांसद धनंजय सिंह, सुशील सिंह, मुज़फ़्फ़रनगर के सुशील मूंछ समेत सूबे के 50 से अधिक कुख्यात माफियाओं, बाहुबलियों और अपराधियों की पूरी ‘क्राइम कुंडली’ तलब कर ली है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन सभी बाहुबलियों को जारी किए गए गन लाइसेंस (शस्त्र लाइसेंस) और उन्हें दी गई सरकारी सुरक्षा की गहनता से जांच की जाए। जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग के अफसरों को 26 मई तक पूरी विस्तृत जांच रिपोर्ट हलफनामे के साथ कोर्ट में पेश करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।
हलफनामा देख हैरान हुआ हाईकोर्ट: 6 हजार से ज्यादा अपराधियों के पास सरकारी असलहे
दरअसल, संत कबीरनगर के निवासी जयशंकर उर्फ बैरिस्टर ने गन लाइसेंस जारी करने में नियमों की घोर अनदेखी और अपराधियों को असलहे बांटे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जब सरकार से रिपोर्ट मांगी, तो गृह विभाग द्वारा दाखिल हलफनामे के आंकड़ों को देखकर अदालत हैरान रह गई। गृह विभाग ने कोर्ट को बताया कि इस समय उत्तर प्रदेश में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी हैं और अभी भी 23 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित पड़े हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि प्रदेश में 6 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों को धड़ल्ले से शस्त्र लाइसेंस दिए गए हैं, जिन पर दो या उससे अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, राज्य में करीब 21 हजार परिवार ऐसे हैं, जिनके पास एक से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस हैं।
कप्तान और पुलिस कमिश्नर देंगे लिखित जिम्मेदारी- “कुछ छिपाया तो खुद भुगतेंगे”
हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में आदेश दिया है कि 26 मई तक यूपी के सभी पुलिस कप्तानों (SP/SSP) और कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नरों को लिखित जिम्मेदारी (अंडरटेकिंग) देनी होगी। गृह विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी हलफनामे के साथ इन पुलिस अधिकारियों की अंडरटेकिंग कोर्ट में जमा करेंगे। इस अंडरटेकिंग में संबंधित जिले के पुलिस कप्तान को यह स्पष्ट रूप से लिखकर देना होगा कि उनके जिले से किसी भी बाहुबली या अपराधी की कोई जानकारी छिपाई नहीं गई है। यदि भविष्य में कोई भी तथ्य छिपाया हुआ पाया गया, तो इसके लिए संबंधित जिले का पुलिस कप्तान या कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा और कोर्ट उनके खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई करेगा।
हथियार दिखाना सुरक्षा नहीं, समाज में डर और असुरक्षा का माहौल बनाना है: हाईकोर्ट
जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा, “पहली नजर में कोर्ट की राय यह है कि खुलेआम हथियार दिखाने से भले ही कुछ लोगों को अपने प्रभुत्व, शक्ति और सुरक्षा का एहसास होता हो, लेकिन इससे समाज में आपसी भाईचारा पूरी तरह बिगड़ता है। आम और शांतिप्रिय लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।” बेंच ने आगे कहा कि कई बार लोग हथियार रखने को आत्मरक्षा के नाम पर सही ठहराते हैं, लेकिन जब हथियार डराने या धमकाने के लिए इस्तेमाल होने लगते हैं, तो वे सुरक्षा नहीं बल्कि खौफ बढ़ाते हैं। ऐसा समाज, जहां हथियारबंद लोग ताकत और धमकी के बल पर अपना दबदबा बनाते हैं, वह न तो शांतिपूर्ण हो सकता है और न ही सुरक्षित।
हाईकोर्ट के रडार पर आए यूपी के सभी जोन के प्रमुख बाहुबली और कुख्यात अपराधी (विस्तृत सूची):
हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जिन प्रमुख बाहुबलियों और अपराधियों के शस्त्र लाइसेंस व सुरक्षा की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, उनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- प्रमुख बाहुबली राजनेता: रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह।
- मेरठ जोन: उधम सिंह, सुशील मूंछ, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा (मृत), योगेश भदौड़ा, बदन सिंह बद्दो, हाजी याकूब कुरैशी, सुनील राठी, शारिक, यशपाल तोमर, धर्मेंद्र, अमरपाल कालू, अनुज बरखा, विक्की त्यागी (मृत), हाजी इकबाल, विनोद शर्मा, विनय त्यागी उर्फ टिंकू त्यागी [मृत] ।
- नोएडा/गौतमबुद्ध नगर: अमित कसाना, अनिल भाटी, सुंदर सिंह भाटी, रणदीप भाटी, मनोज आमे, अनिल दुजाना (मृत), शिवराज सिंह भाटी।
- आगरा व बरेली जोन: आगरा के अनिल चौधरी, ऋषि कुमार शर्मा और बरेली के एजाज।
- लखनऊ जोन: अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, खान मुबारक (मृत), संजय सिंह सिंघाला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहिब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बचू यादव, जुग्नू वालिया उर्फ हरविंदर।
- वाराणसी जोन: त्रिभुवन सिंह उर्फ पवन सिंह, कुंटु सिंह उर्फ ध्रुव सिंह, विजय मिश्रा, अखंड प्रताप सिंह, रमेश सिंह काका, अभिषेक सिंह हनी उर्फ जहर, बृजेश कुमार सिंह, सुभाष सिंह ठाकुर, अब्बास अंसारी, पिंटू सिंह।
- गोरखपुर जोन: राजन तिवारी, संजीव द्विवेदी उर्फ रामू द्विवेदी, राकेश यादव, सुधीर सिंह, विनोद उपाध्याय (मृत), रिजवान जहीर, देवेंद्र सिंह।
- कानपुर जोन: सउद अख्तर और अनुपम दूबे।
- प्रयागराज जोन: प्रदीप सिंह उर्फ डब्बू सिंह, निहाल सिंह उर्फ बच्चा पासी, दिलीप मिश्रा, जावेद, राजेश यादव, गणेश यादव, कमरुल हसन और जाबिर हुसैन।




