ईरान ने लगा दी अमेरिका की वाट ! ट्रंप ने कहा – ‘जान बचाकर भागे नहीं तो खत्म हो जाता सबसे बड़ा युद्धपोत

नई दिल्ली, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग ने अब वो मोड़ ले लिया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। समंदर के बेताज बादशाह कहे जाने वाले 13 बिलियन डॉलर के अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड’ को लेकर एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों के होश उड़ा दिए हैं।

खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पेंटागन की नींद हराम कर दी है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने इस अभेद्य माने जाने वाले न्यूक्लियर कैरियर पर एक-दो नहीं बल्कि पूरे 17 एंगल से मिसाइलें दागीं, जिससे अमेरिकी नौसेना में भगदड़ मच गई। यह खबर इसलिए भी बड़ी है क्योंकि अब तक माना जाता था कि इस महाशक्तिशाली जहाज को छूना भी नामुमकिन है, लेकिन इस घटना ने अमेरिका के अजेय होने के गुरूर को चकनाचूर कर दिया है।

17 कोणों से घेराबंदी और समंदर में मची अफरातफरी

डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता को कम आंकना अमेरिका की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर को चारों तरफ से घेर लिया था। ट्रंप के शब्दों में, “ईरान ने हमारे सबसे शक्तिशाली युद्धपोत पर 17 अलग-अलग कोणों से बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। वहां मंजर इतना खौफनाक था कि हमारे सैनिकों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। अगर हम समय रहते वहां से नहीं निकलते तो आज सब कुछ खत्म हो गया होता।” ट्रंप ने इसे अमेरिकी नौसेना के इतिहास का सबसे बड़ा झटका बताया है। उनके अनुसार, ईरानी मिसाइलों की इस सटीक घेराबंदी ने जहाज पर मौजूद 600 से अधिक नाविकों के बीच दहशत पैदा कर दी और पूरे कैरियर पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पेंटागन की सफाई और शॉर्ट सर्किट का रहस्यमयी दावा

एक तरफ जहां ट्रंप इसे ईरान का घातक हमला बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। पेंटागन का कहना है कि यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड पर कोई बाहरी हमला नहीं हुआ था। आधिकारिक बयान के मुताबिक, जहाज के मुख्य लॉन्ड्री एरिया यानी कपड़े धोने वाले कमरे में बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई थी। यह आग इतनी भीषण थी कि लगभग 30 घंटे तक जलती रही, जिसके कारण धुएं से दर्जनों नाविक बीमार पड़ गए और दो को गंभीर चोटें आईं। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि सैकड़ों नाविकों को अपने बिस्तर छोड़कर फर्श और टेबलों पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, पेंटागन अभी भी इसे ‘नॉन-कॉम्बैट’ घटना बता रहा है और दावा कर रहा है कि जहाज मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है।

मैदान छोड़ मरम्मत के लिए निकला

हकीकत चाहे जो भी हो, लेकिन सच्चाई यह है कि 13 अरब डॉलर का यह अत्याधुनिक युद्धपोत अब युद्ध के मैदान से हट चुका है। रेड सी में चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का नेतृत्व करने वाला यह जहाज अब मरम्मत के लिए ग्रीस के सौदा बे नौसैनिक अड्डे पर भेज दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे वह ईरानी हमला हो या आंतरिक खराबी, इतने बड़े प्लेटफार्म का युद्ध क्षेत्र से हटना अमेरिकी रणनीति के लिए एक बहुत बड़ी हार है। विपक्षी नेता और कई सीनेटर अब नौसेना की तैयारियों और क्रू की थकान पर सवाल उठा रहे हैं। यह घटना दिखाती है कि ईरान के साथ चल रहे एक महीने के युद्ध ने अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया है।

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