‘स्वाभिमान के आगे परीक्षा छोटी है’ प्रवेश पत्र पर फोटो हिजाब में, फिर केंद्र पर रोक क्यों? अलीशा के टूटे सपनों ने कोटा में छेड़ी नई बहस

कोटा, शिक्षा की नगरी कोटा में एक बार फिर ‘हिजाब’ को लेकर छिड़े विवाद ने प्रदेश की सियासत और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रीट मेन्स लेवल-2 की परीक्षा देने पहुंची बूंदी की अलीशा को जब महावीर नगर स्थित तिलक स्कूल केंद्र पर हिजाब उतारने के लिए मजबूर किया गया, तो उसने अपनी बरसों की मेहनत को दांव पर लगा दिया और परीक्षा छोड़ दी।

‘स्वाभिमान के आगे परीक्षा छोटी है’ .

भावुक होकर अलीशा ने बताया कि महिला सुरक्षाकर्मियों ने उसकी सघन तलाशी ली, हिजाब खोलकर जांच की, लेकिन कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। इसके बावजूद उसे हिजाब पहनकर अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। अलीशा का कहना है, ‘इतने बच्चों के बीच सिर खोलना मेरे लिए अपमानजनक था। यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, मेरे आत्मसम्मान का सवाल था।’

गाइडलाइंस पर उठे सवाल: पहले क्यों नहीं रोका?

अलीशा का आरोप है कि कर्मचारी चयन बोर्ड के नियमों के तहत दुपट्टा या चुन्नी पहनने की अनुमति है, लेकिन केंद्र पर मौखिक आदेशों के नाम पर उसे प्रताड़ित किया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अलीशा के प्रवेश पत्र पर लगी फोटो भी हिजाब में है। उसने पहले भी RPSC और चयन बोर्ड की कई बड़ी परीक्षाएं इसी लिबास में दी हैं, तो फिर इस केंद्र पर नियम अचानक क्यों बदल गए?

बिखर गए 17 महीनों के सपने

दोपहर 1 से 2 बजे तक अलीशा और उसके पिता केंद्र प्रभारी से गुहार लगाते रहे, लेकिन सिस्टम की हठधर्मिता ने एक होनहार छात्रा का भविष्य दांव पर लगा दिया। वीडियो वायरल होने के बाद अब सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या ‘नियम’ धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत गरिमा से बड़े हैं?

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