



मुंबई, अगर कुछ कर दिखाने की चाहत हो और उसके अनुरूप निरन्तर प्रयास किए जाएं तो विपरीत परिस्थितियां होने के बावजूद भी आपको सफलता पाने से कोई रोक नहीं सकता। आज हम आपको बताएंगे एक आईएएस अधिकारी की कहानी जिन्होंने अपनी जिंदगी में संघर्षों का बड़ा दौर झेला और अपनी हिम्मत और काबिलियत से सफलता पाई।
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वरुण का जन्म महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार में हुआ था। इनका बचपन बहुत गरीबी में बीता है। वरुण बरनवाल को पढ़ाई करने का बहुत शौक था। वरुण बरनवाल ने 10 वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने एक साइकिल की दुकान में पंक्चर बनाने का काम करना शुरू कर दिया। वरुण ने 2006 में 10वीं के परीक्षा दी और परीक्षा देने के तीन दिन बाद उनके पिता की मृत्यु हो गई।
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जब 10 वीं का रिजल्ट आया तो वह स्कूल भर में टॉप किए। इनकी मां ने इन से कहा कि तुम पढ़ाई पर ध्यान दो, काम हम सब मिलकर कर लेंगे। जब ये 11वीं-12वीं में थे तब ये साल इनका काफी कठिन साल रहा। ये सुबह 6 बजे उठकर स्कूल जाते थे और 2 बजे से रात 10 बजे तक ट्यूशन लेते थे। फिर इसके बाद दुकान का हिसाब भी करते थे।
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वरुण बरनवाल को इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छे-से-अच्छे कंपनी से नौकरी के लिए ऑफर आने लगे। लेकिन इन्होंने मन बना लिया था कि इन्हें सिविल सर्विसेज की तैयारी करनी है। परन्तु इन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि तैयारी करनी कैसे है। उसी बीच इनके भाइयों ने इनकी काफी मदद की। और वरुण बरनवाल ने अपने मेहनत और कठिन परिश्रम से यूपीएससी की तैयारी की।
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साल 2013 में इन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी जिसमें उन्होंने 26 वां रैंक हासिल किया। इन्हें गुजरात में डिप्टी कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया। वरुण बरनवाल अपने जीवन में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना कर अपने हौसले को कभी पीछे हटने नहीं दिया। और वे कभी मुड़ कर पीछे नहीं देखे। इसलिए आज वे एक सफल इंसान बने हैं।